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दशहरा की राम-राम पहुंचे…पान खाओ जू…

बुंदेलखंड में सदियों से चली आ रही है दशहरा पर पान खाने व खिलाने की परम्परा

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The tradition of feeding and feeding on Dussehra in Bundelkhand

The tradition of feeding and feeding on Dussehra in Bundelkhand

टीकमगढ़. भारत कृषि प्रधान देश ही नहीं परम्पराओं का देश भी है। देश में कोस-कोस पर पानी और बोली बदल जाती है। वहीं कुछ परम्पराएं भी अनूठी हैं। जी हां, बुंदेलखंड में दशहरा पर एक अनूठी परम्परा है जो सदियों से चली आ रही है।यह परम्परा है दशहरा पर पान खिलाने की।
आज भी यह परम्परा उत्साह के साथ बखूबी निभाई जा रही है।पान की दुकानों पर ग्राहकों की लम्बी-लम्बी कतारें और लोगों के ओठों की लाली इस परम्परा के साक्षी हैं। बुंदेलखंड में इस परम्परा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पान की जिस दुकान में अन्य दिनों औसतन दो सौ खिल्ली पान की बिक्री होती है, उन्हीं दुकानों में दशहरा के दिन पान की बिक्री संख्या हजारों में हो जाती है।
वहीं घरों में भी लोग पान लगा कर रखते हैं। घरों में आने वाले अतिथियों को भी पान खिलाकर इस परम्परा का निर्वहन किया जाता है।इतना ही नहीं अतिथि भी अपने साथ पान लाना नहीं भूलते। बुंदलेखंड की परम्परा के अनुसार सभी एक-दूसरे को 'दशहरा का राम-राम पहुंचे जू... पान खाओ जू...Ó कहते हुए पान का बीड़ा आगे बढ़ाते हैं।
दो दिन से तैयारी
देसी पान निकट के चंदेरा और पाली (ललितपुर) से तथा मिठुआ व बंगला पान भोपाल से मंगवाया जाता है।दशहरे पर पान की बिक्री को देखते हुए दुकानदार दो दिन से इसकी तैयारी करते हैं।कमल शब्दानी ने बताया कि उसकी यह चौथी पीढ़ी है जो शहरवासियों को पान खिला रही है। कमल ने बताया कि दशहरा पर सुबह सात बजे से रात 11 बजे तक पान लगाने का कार्य किया जाता है।पान उत्पादक किसान भी दो दिन पूर्व से शहर में सादे पान की बिक्री के लिएपहुंच जाते हैं।
15 रुपए से 35 रुपए तक का पान
टीकमगढ़ शहर में सामान्यत: 15 रुपए प्रति खिल्ली पान की बिक्री हुई। वहीं स्पेशल पान 35 रुपए प्रति खिल्ली तक बिका। पान विक्रेता कमल शब्दानी, हरकिशन कड़ा व सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि पान में भी विभिन्न वैराइटियां हैं। मीठा पान 15 रुपए प्रति खिल्ली है वहीं चाकलेट पान 25 रुपए, ड्राईफ्रूट पान 35 रुपए तथा आईस पान 30 रुपए प्रति खिल्ली है। दशहरे पर पान की अत्यधिक बिक्री के कारण परिवार की महिला सदस्य भी इस कार्य में सहयोग करती हैं।दुकानों पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण पान लगाने से लेकर पैकिंग तक का कार्य घरों में भी किया जाता है।
रावण दहन के बाद दुकानों पर भीड़
दशहरा पर रावण दहन के बाद दुकानों पर एकाएक ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है।दरअसल, नजरबाग प्रांगण में रावण दहन का मुख्य कार्यक्रम होता है।हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। रावण के पुतले का दहन होने के बाद आसपास की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ एकाएक बढ़ जाती है।