
Union Minister of State in the Bundeli language national conference
ओरछा. पर्यटन नगरी में चल रहे दो दिवसीय बुंदेली भाषा के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल ने रविवार को शिरकत की। केन्द्रीय मंत्री पटेल ने परिवार सहित श्रीरामराजा मंदिर पहुंचकर रामराजा सरकार के दर्शन कर पूजा अर्चना की। पटेल ने रामराजा सरकार के दर्शन के बाद पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि देश की लोककला ,नृत्य , भाषा ,संगीत कला को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार लगातार प्रयासरत है। ओरछा पुरातत्व, साहित्यिक, आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां के पर्यटन को बढ़ाने की दृष्टि से कुरुक्षेत्र से खजुराहो तक ट्रेन शुरू की जा रही है । दो दिवसीय बुंदेली भाषा के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन कार्यक्रम में पंहुचे पटेल ने कहा कि बुंदेली भाषा को आठवी अनुसूची की भारतीय भाषाओं में शामिल करने के लिए हमे कठोर परिश्रम की आवश्यकता है। पहले हम बुंदेली साहित्य एकत्र करके साहित्यकारों की सूची तैयार करे । सरकार को लिखित दस्तावेज बनाकर दे। तभी यह कामसंभव है। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री पटेल ने कहा कि इस भाषा को बोलने वाले करोडो लोग हैं । बुंदेली भाषा का उत्थान तभी संभव है ,जब हम सभी इस लोक बोली को बोले और बच्चों को सिखाए। कार्यक्रम के दौरान बुंदेली भाषा को सम्मान दिलाने वाले पद्मश्री डॉ कैलाश मडवैया द्वारा लिखित बेतवा के तीरे नामक पुस्तक का विमोचन किया गया।
कांग्रेस सेवादल को बताया छिछोरा संगठन
पत्रकारो से बात करते हुए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री पटेल ने कांग्रेस सेवादल द्वारा जारी की पुस्तक पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस सेवादल जैसे छिछोरे संगठनों से आरएसएस ,भाजपा और वीर सावरकर जैसे राष्ट्रभक्तो को देश भक्ति के प्रमाणपत्र की जरूरत नही है । उन्होंने कांग्रेस सेवादल की पुस्तक में किए गए दावे को लेकर कहा कि यह बेहद शर्मनाक है । इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है।
यह रहे मौजूद
सम्मेलन में सम्मेलन के संरक्षक महाराजा मधुकर शाह जू देव ,गरौठा विधायक जवाहर राजपूत,प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अवधेश प्रताप सिंह राठौर , साहित्यकार अभिनन्दन गोयल इंदौर ,कमलापति रावत रचनाकार भोपाल, डॉ धर्मेंद्र पटेल महात्मा गाँधी हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, प्रभादेवी विश्वकर्मा जबलपुर, लक्ष्मी शर्मा जबलपुर, मीना भट्ट, प्रेमनारायण शर्मा ,मातादीन यादव, गुलाब सिंह यादव, डॉ कीर्ति दीक्षित ,डॉ कामिनी , डॉ शिरोमणि सिंह दतिया, रामनिवास तिवारी , सीताराम राय , पूरन चन्द गुप्ता, सत्यनारायण तिवारी, डॉ दुर्गेश दीक्षित कुंडेश्वर, डॉ देवदत्त तिवारी बडामलहरा, डॉ हर्षवर्धन चतुर्वेदी निवाडी, प्रेमनारायण चौबे के अलावा जिलों के साहित्यकार उपस्थित रहे ।
Published on:
06 Jan 2020 10:26 am
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