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किसी के पास नही हिसाब,रेस्ट हाउस पर अधिकारियो का रहता है कब्जा

वीआईपी को सुविधा देने वाले इन आरामगाहो का हिसाब किसी के पास नही है

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टीकमगढ़.जिले में लोक निर्माण विभाग के कहने को तो छह रेस्ट हाउस है लेकिन विभाग की तरह ही वीआईपी को सुविधा देने वाले इन आरामगाहो का हिसाब किसी के पास नही है। केवल एक फोन पर ही राजसी सुख भोगकर वीआईपी तो चले जाते है,लेकिन उन्हें सुविधा देने के नाम पर सरकार का लाखों खर्च हो जाता है। विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए जिला मुख्यालय के रेस्ट हाउस पर लाखो का खर्च चर्चा का बिषय रहा,इस मामले में शिकायत होने पर जांच की बात भी सामने आई थी।

यही हाल नवगठित निवाडी जिले का है ,जंहा के रेस्ट हाउस में पिछले पांच माह से कलेक्टर और एसपी का निवास बना हुआ है। पीडब्ल्यूडी विभाग के कहने को तो सभी विकासख्ंाड मुख्यालय पर रेस्ट हाउस है,लेकिन आय के मामले में आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया जैसा बना हुआ है। आलम यह है कि पिछले पांच वर्षो में सरकारी हाउसो से विभाग को करीब एक लाख की भी आय नही हुई है।

दरअसल में इन सरकारी हाउसो का इस्तेमाल सिर्फ राजनेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाता है,पर किराया भरने की जहमत कोई नही उठाता है। जिससे सरकारी विश्राम गृहो के संचालन और मेंटेनेंस को लेकर विभाग को भी पसीना छूटने लगता है। सरकारी विश्राम गृहों के यह हालात अकेले जिले में ही नही प्रदेश स्तर पर बनी हुई है। मामले की गूंज विधानसभा में भी हो चुकी है।

पर्यटन नगरी में चार माह से प्रशासन का बसेरा
जिले का वैसे तो विभाजन होने के साथ निवाडी का गठन कर दिया गया है,लेकिन पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभाग टीकमगढ़ से ही संचालित हो रहे है। अक्टूबर में निवाडी के गठन होने के साथ ही कलेक्टर और एसपी तो मिल गए,लेकिन उनके आवास की व्यवस्था सरकार नही कर पाई,लिहाजा वह निवाडी मुख्यालय से करीब २५ किमी दूर पर्यटन नगरी ओरछा के रेस्ट हाउस में निवास बनाए हुए है।

जिससे विभाग को आय होना तो दूर सुविधाओं में ही पसीना बहाना पड रहा है। जिसके चलते केवल सिंचाई विभाग का रेस्ट हाउस ही खाली है,जिसके लिए विभाग को ५०० रुपए देना होता है,लेकिन राजा राम के दर्शन को आने वाले वीआईपी रसीद कटाना भी उचित नही समझते है।

आय का नही हिसाब
जिला मुख्यालय पर रेस्ट हाउस में वैसे तो साल भर राजनेताओ और अधिकारियों को आना जाना लगा रहता है। सर्किट हाउस में विभाग की ओर से ३०० रुपया किराए का निर्धारण किया गया है। लेकिन बुधवार को कार्यालय के चक्कर काटने के बाद बाबू से लेकर साहब तक किसी के पास भी जानकारी नही थी।

हालाकि प्रत्येक माह को जिले भर से जानकारी आने की बात कही गई ,लेकिन हिसाब के नाम पर जल्दी ही बनाकर देने की बात कही गई। जिला मुख्यालय के छह कमरों में से तीन के हमेशा आरक्षित रहने के बाद भी जिले के तीन कमरों और बल्देवगढ़ के रेस्ट हाउस के तीन कमरों को देखा जाए तो रोजाना की आय १८०० रुपए होना चाहिए । इस तरह एक माह में ५४ हजार और साल के ६ लाख ४८ हजार की आय होनी चाहिए।

चार साल पहले किया गया था किराया दोगुना
लोक निर्माण विभाग मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार के द्वारा लोक निर्माण विभाग के विश्राम भवन का किराए को लेकर नए आदेश जारी किए गए थे। इस आदेश में किराए को लेकर संशोधन करने की बात कही गई थी,लेकिन जो नवीन दरों का निर्धारण किया गया,वह पहले की दरों की तुलना में दोगुनी है।

छह रेस्ट हाउस पर हो रहा लाखो खर्च
लोक निर्माण विभाग के जिले में विश्राम गृह के साथ ही छह रेस्ट हाउस है। जिनके मेंटेनेंस पर प्रत्येक माह लाखो रुपए खर्च होता है। इसके साथ ही विभाग के कर्मचारियों के वेतन अलग है। जिला मुख्यालय पर स्थित विश्राम गृह में ही पुताई पर करीब २ लाख का खर्च बताया जाता है।

इसके अलावा बिजली बिल अलग से विभाग को ही भरना होता है। हालाकि बिजली बिल के साथ ही भोजन की व्यवस्था के लिए भी विभाग को ठहरने वाले वीआईपी से चार्ज लेना होता है ,लेकिन केवल कागजो में ही यह लीपापोती की जाती है। वही विभाग में अमले की कमी के कारण मजदूरो द्वारा ही संचालन किए जाने से उनका भार भी वहन करना पड़ता है।

कहते है अधिकारी
विभाग को प्रशासनिक अधिकारियो के द्वारा ही वीआईपी के ठहरने के निर्देश मिलते है। किराया लिया जाता है,हिसाब एकदो दिन में मुहैया करवा देगें। किराए के भरोसे मेंटेनेंस नही हो पाता है।
के के शर्मा कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग टीकमगढ़