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टीकमगढ़

8वीं बार सांसद बने वीरेंद्र, इस बार भी खाता नहीं खोल सकी कांग्रेस

भाजपा ४,०३,३१२ मतों से जीती, कांग्रेस नहीं ढहा पाई गढ़ टीकमगढ़. लोकसभा गठन के बाद से टीकमगढ़ सीट पर कांग्रेस की जीत की उम्मीद इस बार भी पूरी नहीं हो सकी। टीकमगढ़ लोकसभा गठन के बाद जहां भाजपा ने लगातार चौथी जीत दर्ज की है, तो प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार भी इस सीट पर चौथी जीत […]

टीकमगढ़Jun 05, 2024 / 02:24 am

हामिद खान

टीकमगढ़. जीत के बाद निकले गए जुलूस में जनता का अभिवादन करते हुए सांसद।

टीकमगढ़. जीत के बाद निकले गए जुलूस में जनता का अभिवादन करते हुए सांसद।

भाजपा ४,०३,३१२ मतों से जीती, कांग्रेस नहीं ढहा पाई गढ़

टीकमगढ़. लोकसभा गठन के बाद से टीकमगढ़ सीट पर कांग्रेस की जीत की उम्मीद इस बार भी पूरी नहीं हो सकी। टीकमगढ़ लोकसभा गठन के बाद जहां भाजपा ने लगातार चौथी जीत दर्ज की है, तो प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार भी इस सीट पर चौथी जीत के साथ लगातार 8 बार सांसद बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने यहां से रिकॉर्ड 4 लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की।
पॉलिटेक्निक कॉलेज में सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना में जैसे-जैसे काउंटिंग के चरण बढ़ते जा रहे थे, वैसे-वैसे भाजपा की जीत का अंतर बड़ा होता जा रहा था। इस गणना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में चल रहा तीन विधानसभा चुनाव हारने का लोकसभा में असर पडऩे का संशय भी दूर हो गया।
भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार ने हर विधानसभा में पहले ही राउंड से बढ़त बनानी शुरू कर दी। सुबह से ऊर्जा के साथ अंदर पहुंचे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को इस बार लग रहा था कि स्थानीय प्रत्याशी के मुद्दे और क्षेत्र में विकास न होने पर शायद जनता उनका साथ नहीं देगी, लेकिन मतगणना में ऐसा कुछ नहीं दिखा। हर राउंड में भाजपा सांसद वीरेंद्र कुमार लगभग दोगुनी बढ़त लेते जा रहे थे।
जैसे-जैसे ईवीएम मशीनें खुलती जा रहीं थी भाजपा नेताओं के चेहरों पर खुशी और कांग्रेसियों के चेहरों पर मायूसी दिखाई देने लगी थी। इस बार भी वीरेंद्र कुमार के विजयी रथ को कोई नहीं रोक सका और उन्होंने टीकमगढ़ लोकसभा से जहां लगातार चौथी जीत दर्ज की तो उनकी यह लगातार 8वीं जीत थी। टीकमगढ़ के पहले वह सागर आरक्षित सीट से भी लगातार चार बार सांसद रह चुके है। वहीं कांग्रेस को अब तक टीकमगढ़ लोकसभा सीट पर एक भी बार जीत का स्वाद नहीं मिला है। इस बार भी कांग्रेस के खाते में हार आई और जीत के लिए पांच सालों का इंतजार और बढ़ गया।
कम वोटिंग फिर भी बढ़े भाजपा के वोट
विदित हो कि पिछले लोकसभा चुनाव में जिले में 66.161 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। उस चुनाव में जिले में 10,97,454 वोट डले थे। उसमें वीरेंद्र कुमार को 6,72,248 मत मिले थे, जबकि इस बार लोकसभा में महज 60 फीसदी वोटिंग हुई और कुल 10,96,023 वोट डाले गए। इसमें वीरेंद्र कुमार को 7,15,050 मत मिले हैं। ऐसे में जिले में भाजपा वोट प्रतिशत लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
वहीं कांग्रेस का वोट कम हुआ है। पिछली बार कांग्रेस की प्रत्याशी रही किरण अहिरवार ने 29.56 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे तो इस बार पंकज अहिरवार 28.38 प्रतिशत वोट ही प्राप्त कर सके।
3 बजे पहुंचे सांसद गणना स्थल
मंगलवार की सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई थी। पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रशासन सुबह 6 बजे ही पहुंच गया था और सभी कर्मचारियों ने अपना मोर्चा संभाल लिया था। वहीं सुबह 7 बजे तक सभी पार्टियों एवं प्रत्याशियों के एजेंट मतगणना स्थल पर अपनी-अपनी टेबल पर पहुंच चुके थे। निर्वाचन आयोग के निर्देशन में सुबह 8 बजे स्ट्रांग रूम से डाक मतपत्र के साथ ही ईवीएम मशीनों को बाहर निकाला गया और विधानसभावार गणना कक्ष में पहुंचाया गया। इसके बाद मतगणना शुरू हुई।
सुबह से पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी खुमान पंकज अहिरवार भी अपने प्रत्याशियों के साथ मतगणना स्थल पहुंच गए थे, लेकिन भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार मतगणना स्थल न पहुंच कर सीधे श्रीरामराजा सरकार की नगरी ओरछा पहुंचे। यहां पर उन्होंने भगवान की विशेष पूजा की। इसके बाद वह निवाड़ी पहुंचे और यहां पर पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रूझान लिए। इसके बाद वह छतरपुर जिले के लिए रवाना हो गए। वहां पर भी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर दोपहर 3 बजे वह टीकमगढ़ पहुंचे।
यहां पर धजरई त्रिगेला पर पार्टी कार्यकर्ता उनका इंतजार कर रहे थे। यहां से काफिले के साथ वह मतगणना स्थल पहुुंचे। तब तक मतगणना लगभग पूरी हो चुकी थी। उनके आने की सूचना पर मतगणना कक्ष में बैठे कार्यकर्ता भी बाहर आए गाए और सभी ने उन्हें जीत की बधाई दी। वहीं आठों विधानसभाओं की गणना पूर्ण होने के बाद जैसे ही इसकी पूरी रिपोर्ट ईसीआई की साइट पर दर्ज की गई तो जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर अवधेश शर्मा ने सांसद को जीत का प्रमाण-पत्र सौंप दिया। इसके बाद वह पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए शहर का रूख किया।
भाजपा ने लगाया जोर, तो खामोश रही कांग्रेस
हर चुनाव में खास रणनीति के साथ पेशेवर तरीके से मैदान में उतरने वाली भाजपा ने इस बार भी जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर राम मंदिर के मुद्दे को हाथ में लेकर चुनाव मैदान में उतरी भाजपा शुरू से ही आगे दिखाई दे रही थी। इसके बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पूरा जोर लगाया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने टीकमगढ़ के साथ ही छतरपुर में रोड शो किया तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी चुनावी सभा को संबोधित करने पहली बार जिले में पहुंचे। उन्होंने भी मोदी की गारंटी को मतदाताओं तक पहुंचाया और कांग्रेस पर जमकर आरोप लगाए।
इसकी दूसरी तरफ कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता यहां पर सभा और संपर्क करने नहीं पहुचा। कांग्रेस प्रत्याशी पंकज अहिरवार के नामांकन के दिन पहुंचे प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी सहित अन्य नेताओं ने कार्यकर्ताओं की एक बैठक ली, इकसे बाद किसी ने यहां पर ध्यान नहीं दिया। टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले से कांग्रेस के तीन विधायक कुछ किला लड़ाने का प्रयास करते दिखाई दिए, लेकिन वह भी भाजपा के व्यूह को तोड़ नहीं सके। इस बार कांग्रेस इंडिया गठबंधन से चुनाव मैदान में था। यूपी से लगी इस सीट पर यादव मतदाता निर्णायक भूमिका में है, यदि कांग्रेस रणनीति के तहत सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की यहां पर सभा कराती तो चुनाव कुछ जोर पकड़ सकता था, लेकिन कोई भी इस प्रकार की रणनीति बनाता नहीं दिखा।
6 माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार से कांग्रेस का हर कार्यकर्ता मैदान में था, लोकसभा चुनाव में वह नहीं दिखाई दिया। वहीं भाजपा जहां पूरी तैयारी से मैदान में थी उसके अन्य संगठन भी बराबरी से क्षेत्र में सक्रिय रह कर काम कर रहे थे। ऐसे में भाजपा ने लगातार चार जीत का रिकॉर्ड बना लिया है।

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