नीतू ने कहा, 'इसलिए मैंने और मेरे भाई ने भोजपुरी, मैथिली और मगही भाषा में फिल्में बनाने की ठानी। हम फिल्मों के जरिए अपनी मातृभाषा की छवि बदलना चाहते हैं, जिसे बहुत बदनाम किया गया है।' नीतू ने आगे कहा, 'इसका व्यापार के कुछ लेना देना नहीं है, जैसा कि वह कहते अगर आप बदलाव चाहते हैं, तो आपको बदलाव लाना पड़ेगा।' नीतू राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अपने भाई नितिन चंद्रा के साथ चंपारण टॉकीज नामक एक प्रॉडक्शन हाउस चलाती है।