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विनोबा भावे के भू-आंदोलन से बसे गांधीग्राम को आज भी विकास का इंतजार

150th birth anniversary of Mahatma Gandhi: महात्मा गांधी के पथ प्रदर्शक विनोबा भावे की ओर से चलाए भू-आंदोलन के दौरान करीब छह दशक पूर्व बसाए गांधीग्राम में गांव के हालात को देख कर मन द्रवित हो उठता है।

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विनोबा भावे के भू-आंदोलन से बसे गांधीग्राम को आज भी विकास का इंतजार

विनोबा भावे के भू-आंदोलन से बसे गांधीग्राम को आज भी विकास का इंतजार

मधुसूदन गौतम
दूनी. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2अक्टूबर को देश-प्रदेश में मनाई जा रही है। इसमें जिला प्रशासन की ओर से भी आयोजित पखवाड़े के तहत कई कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन महात्मा गांधी के पथ प्रदर्शक विनोबा भावे की ओर से चलाए भू-आंदोलन के दौरान करीब छह दशक पूर्व बसाए गांधीग्राम में गांव के हालात को देख कर मन द्रवित हो उठता है।


देवली तहसील की संथली ग्राम पंचायत के अधीन आने वाले गांधीग्राम प्रथम.द्वितीय में कुल 751 मतदाता हैं। गांव की आबादी करीब दो हजार होने के साथ ही दोनों गांवों में 150-150 घरों की बस्ती है। इसमें अभी भी 50 प्रतिशत कच्चे मकान हैं। गांव में सार्वजनिक विभाग की ओर से दूनी से गांधीग्राम तक करीब छह किलोमीटर सडक का निर्माण 2006 में कराया गया था।

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साथ ही गांधीग्राम प्रथम में उच्च प्राथमिक व गांधीग्राम द्वितीय में प्राथमिक स्तर का विद्यालय है। जहां प्रथम में 97 व द्वितीय में मात्र 35 विद्यार्थियों का ही नामांकन है। साथ ही करीब तीन दर्जन से अधिक विद्यार्थी दूनी सहित निजी विद्यालयों में अध्यनरत है। गांधीग्राम प्रथम में वर्तमान में चार जने द्वितीय में तीन जने सरकारी नौकरी में है।

गांव में अधिकतर परिवारों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया। आधी.अधूरी सडक बनी है। हैडपम्पों का फ्लोराइडयुक्त पानी पीना पड़ रहा है। गांधीग्राम प्रथम व द्वितीय में दो हजार बीघा भूमि दान में मिलने के बाद15-15 बीघा प्रति परिवार बंटवारा कर दिया। गांधीग्राम आज भी राजस्व विभाग से नकल भीमपुरा के नाम से ही निकलती है।

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देवली तहसील की संथली ग्राम पंचायत के अधीन आने वाले गांधीग्राम प्रथम.द्वितीय में कुल 751 मतदाता हैं। गांव की आबादी करीब दो हजार होने के साथ ही दोनों गांवों में 150-150 घरों की बस्ती है। इसमें अभी भी 50 प्रतिशत कच्चे मकान हैं। गांव में सार्वजनिक विभाग की ओर से दूनी से गांधीग्राम तक करीब छह किलोमीटर सडक का निर्माण 2006 में कराया गया था।

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गांव के हालात देखकर ऐसा लगा की सरकारें आती गई और जाती गई, लेकिन छह दशक में कोई विकास कार्य गांव में नहीं हुआ। दो-चार लोगों को छोडकर सभी कृषि पर आधारित है। युवा सबसे अधिक बेरोजगारी की समस्या से जुझ रहे हैं। इससे लग रहा है कि सरकारों ने गांधी तेरे ग्राम की सुध नहीं ली। गांव बसाने के दौरान बनाए आश्रम, हथकरघा केन्द्र, विद्यालय व अन्य भवन सार-संभाल के अभाव में बदहाल,खण्डर में तब्दील होने लगे हैं।

अतिक्रमियों ने भी अब उन पर नजर डाल दी है। आजादी के बाद उत्पीडऩ के शिकार दलितों के उत्थान के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पथ-प्रदर्शक विनोबा भावे ने भू-दान आंदोलन शुरू किया था। इसमें राजा-महाराजा, जमींदारों, उद्योगपतियों को अपने पक्ष में लेकर दलितों को जमीन देकर बसाने का कार्य शुरू किया।

विनोबा भावे की प्रेरणा से जयनारायण व्यास, उद्योगपति त्रिलोकचंद कोठारी, मोरपाल सहित अन्य टीम ने 1951 में यहां गांधी आश्रम बना ग्राम दानी ग्रामसभा, गांधीग्राम का गठन कर भीलवाड़ा जिले के कुंचलवाड़ा निवासी भंवर विद्यार्थी को पहला अध्यक्ष बनाया था।

इसके बाद कई दलित परिवार आश्रम के पास ही झोपडियां बनाकर रहने लगे थे। वहां उनके रोजगार के लिए हथकरघा केन्द्र खोल विद्यालय का निर्माण भी कराया गया। पेयजल के लिए कुआं खुदवा एक सुंदर स्वागत द्वार का निर्माण कराया गया। इसके बाद विनोबा भावे, उद्योगपति त्रिलोकचंद कोठारी सहित टीम व समिति के प्रयासों से उनियारा रावराजा सरदार सिंह ने दो हजार बीघा जमीन दलितों को रहने के लिए दानकर दी।

इसके बाद सभी परिवारों को खेती व रहने के लिए जमीन का बंटवारा कर 1954 में गांधीग्राम गांव की स्थापना की। सभी परिवार कच्चे मकान बनाकर वहां रहने लगे और खेती कर व आश्रम में लगे हथकरघा केन्द्र पर चरखा चलाकर सूत कातकर जीवन.यापन करने लगे। दलित परिवारों की ओर से मकान दूर-दूर तक बनाने के कारण गांव की पहचान गांधीग्राम प्रथम व द्वितीय हो गई। इसके बाद सालों तक ग्राम दानी ग्रामसभा की ओर से गांवों की सार-संभाल व विकास कार्य हुए।

बदहाल हो गए आश्रमए भवन व विद्यालय
समिति की ओर से आश्रम, हथकरघा केन्द्र व विद्यालय का निर्माण कराया गया। हथकरघा केन्द्र 1954 से 1985 तक चलता रहा। इसके बाद मेहनताना कम मिलने के कारण लोगों का हथकरघा से मोहभंग होने से बंद हो गया। हालांकि समिति अभी भी संचालित है, जिसमें पंचायत सरपंच ही अध्यक्ष होता है। आश्रम, विद्यालय व हथकरघा केन्द्र के किवाड़, टीनशेड़ए खिडकियां सहित चुरा ले गए।

बदहाल हो गए आश्रमए भवन व विद्यालय
समिति की ओर से आश्रम, हथकरघा केन्द्र व विद्यालय का निर्माण कराया गया। हथकरघा केन्द्र 1954 से 1985 तक चलता रहा। इसके बाद मेहनताना कम मिलने के कारण लोगों का हथकरघा से मोहभंग होने से बंद हो गया। हालांकि समिति अभी भी संचालित है, जिसमें पंचायत सरपंच ही अध्यक्ष होता है। आश्रम, विद्यालय व हथकरघा केन्द्र के किवाड़, टीनशेड़ए खिडकियां सहित चुरा ले गए।

फैक्ट फाइल
. गांधीग्राम गांव की स्थापना 1954 में
. गांधी आश्रम बना 1951 में
. ग्रामसभाए गांधीग्राम का गठन 1951 में
. भंवर विद्यार्थी थे पहले अध्यक्ष
. हथकरघा केन्द्र 1954 से 1985 तक चला
. उनियारा रावराजा सरदार सिंह ने 2 हजार बीघा जमीन दान की
. कुल 751 मतदाता हैं
. कुल 300 घरों की बस्ती

.1951 में गांधी आश्रम की शुरुआत विनोबा भावे की प्रेरणा से जयनारायण व्यासए भंवर विद्यार्थी