
गृहस्थ जीवन का किया त्याग, चुनी वैराग्य की राह
दूनी. गृहस्थ त्याग दीक्षा लेने जा रही देवली निवासी विमला दीदी की बुधवार को दिगम्बर जैन समाज के लोगों ने सजे-धजे रथ में सवार कर बैण्डबाजे के साथ कस्बे में ङ्क्षबदोरी निकाली। इससे पहले महिला-पुरुषों ने दीक्षार्थी विमला की गोद भराई की रस्म भी आयोजित की। दीक्षार्थी विमला दीदी श्रवणबेलगोला (बेंगलुरु) में विराजमान गणिनी आर्यिका विशिष्टमति से 29 अगस्त को दीक्षा ग्रहण करेंगी।
दीक्षार्थी विमला करीब 6 साल से गृहस्थ त्यागकर गणिनी आर्यिका विशिष्टमती संघ में रह रही है। समारोह आयोजन समिति के प्रकाशचंद जैन ने बताया कि दीक्षार्थी विमला दीदी की सुबह चुंगीनाका मोहल्ले से सजे-धजे रथ में सवार कर गाजे-बाजे से ङ्क्षबदोरी रवाना की। ङ्क्षबदोरी सरोली मोड़, बस स्टैण्ड, मुख्य बाजार, दूणजा माता मार्ग होकर जैन मंदिर पहुंची जहां दीक्षार्थी विमला ने भगवान के दर्शन किए।
इस दौरान ङ्क्षबदोरी का जगह-जगह समाज के लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इससे पहले संतरादेवी जैन के निर्देशन में महिला-पुरुषों ने दीक्षार्थी विमला दीदी की गोद भराई रस्म आयोजित की। इस मौके पर चितरंजन कोठारी, पवनकुमार बड•ाात्या, संजयकुमार जैन, पदम जैन, मनोज जैन, नीरज कटारिया, सुनील जैन, कमलकुमार जैन, गोरी जैन, रेणू जैन, अंजना देवी अन्य थे।
अङ्क्षहसा के बल पर देश को मिली आजादी
निवाई. सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के ससंघ सान्निध्य में शांतिनाथ मण्डल विधान हुआ। इस दौरान शांतिप्रभु की वृहद शांतिधारा करने का सौभाग्य महेश जैन को मिला। इसके पश्चात स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य में भारतमाता को राष्ट्रगान पूर्वक वंदन किया। आर्यिका विज्ञाश्री ने प्रवचन माला में कहा कि महात्मा गांधी ने जिस अङ्क्षहसा के बल पर देश को आजादी दिलाई।
उसकी प्रेरणा उन्हें जैन संस्कारों से ही मिली थी। भगवान महावीर ने अङ्क्षहसा परमो धर्म का संदेश देकर मानव को जियो और जीने दो के लिए प्रेरित किया था। चातुर्मास कमेटी के प्रचार संयोजक विमल जौंला ने बताया कि 23 अगस्त को सहस्त्र कूट जिनालय गुन्सी में एवं जैन मुनि शुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में भगवान पाŸवनाथ का निर्वाण महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
Published on:
17 Aug 2023 10:50 am
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