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पशु पहुंचा रहे फसलों को नुकसान, सर्द रातों में किसान कर रहे पहरेदारी

पशु पहुंचा रहे फसलों को नुकसान, सर्द रातों में किसान कर रहे पहरेदारी  

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पशु पहुंचा रहे फसलों को नुकसान, सर्द रातों में किसान कर रहे पहरेदारी

पशु पहुंचा रहे फसलों को नुकसान, सर्द रातों में किसान कर रहे पहरेदारी

नटवाड़ा. खेतो में लहलहाती फ सलों को देखकर किसानो चहेरे खुशी से चमक उठते हैं। वहीं खेतों खड़ी रबी की फ सल को चट करते रोजड़े एवं पशुओं के आंतक से किसानों ंकी मेहनत पर पानी फि रता नजर आ रहा हैं। वहीं कृषि विभाग की तारबंदी अनुदान योजना की प्रक्रिया जटिल होने के कारण सरकार द्वारा मिल रही सहायता से किसान वंचित हो रहे हैं। जानवरों के नुकसान से बचाने के किसान रातभर खेतो में पहरेदारी कर काट रहे हैं।

रात के समय मवेशी का झुण्ड के रूप में खेतों में घुस कर फ सलो को चट कर रहे हैं। वहीं झुण्ड के झुण्ड खेतों में घुसने से सरसों, गेहूं, चना की फसलों को रौंद कर बर्बाद कर रहे है । फ सल नष्ट होने पर किसानों को मुआवजा भी नहीं मिलता हैं, जिससे किसानों को हर वर्ष नुकसान उठाना पड़ता हैं। दिनोंदिन क्षेत्र में नील गायों की सख्यां में इजाफ ा हो रहा हैं, जिसके कारण किसान सर्द रातों में खुले आसमान के तले रतजगा करने को विवश हो रहे हैं।

बर्बाद हो रही है फसलकिसान केसर लाल धाबाई एवं रामदेव प्रजापत ने बताया कि जिस जगह से रोजड़ो का झुण्ड निकलता हैं। वहां की फ सल पूरी तरह से खराब हो जाती हैं। अभी फ सलों की सिचांई करने का समय हैं। सिचांई करने के बाद खेतों में गीला होने के कारण जब मवेशी खेत से गुजरते है तो उनके पैर जमीन में धंसने से फसलों बहुत नुकसान हो रहा हैं। रात के समय आवारा पशु किसानों के लिए सिर दर्द बने हुए है।

तीन किसान एवं बीस बीघा जमीन अनिवार्य कृषि अधिकारी टोंक मुकेश गैना ने बताया कि सरकार द्वारा तार बंदी के लिए अनुदान लेने के लिए अकेला किसान आवेदन नहीं कर सकता हैं। अनुदान लेने के लिए कम से कम तीन किसानों का समूह में बीस बीघा जमीन का होना अनिवार्य हैं। किसान अनुदान लेने के लिए ई-मित्र के माध्यम से पंजीयन करवा कर आवेदन तो करते हैं, लेकिन समूह नहीं बन पाने के कारण अनुदान स्वीकृत नहीं हो पाता हैं ।

पचास फ ीसदी मिलता है अनुदानकृषि सहायक निदेशक टोंक दिनेश कुमार बैरवा ने बताया कि तारबंदी के लिए कृषि विभाग से 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है। इसमे अधिकतम 40 हजार रुपए प्रति किसान या 100 रुपए प्रति मीटर के हिसाब से अनुदान मिलता हैं ।