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गांव में चोरों के आने पर आवाज देकर जगाती थी चामुण्डा माता, आस्था का केन्द्र बना मंदिर

मोर गांव में चोरों के आने पर कभी वो (चामुण्डा माताजी) लोगों को आवाज देकर जगाती थी, विरान जंगलों में स्थित चामुण्डा माताजी का मंदिर अब क्षेत्रवासियों के लिए श्रद्धा व आस्था का प्रमुख केन्द्र बन गया है।  

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गांव में चोरों के आने पर आवाज देकर जगाती थी चामुण्डा माता, आस्था का केन्द्र बना मंदिर

गांव में चोरों के आने पर आवाज देकर जगाती थी चामुण्डा माता, आस्था का केन्द्र बना मंदिर

टोडारायसिंह. मोर गांव में चोरों के आने पर कभी वो (चामुण्डा माताजी) लोगों को आवाज देकर जगाती थी, विरान जंगलों में स्थित चामुण्डा माताजी का मंदिर अब क्षेत्रवासियों के लिए श्रद्धा व आस्था का प्रमुख केन्द्र बन गया है। मोर गांव से करीब डेढ़किमी. दूर स्थित करीब तीन सौ वर्ष पुरानी चामुण्डा माता की प्रतिमा के दर्शनार्थ नवरात्र में ही नहीं, अनवरत श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

क्षेत्रवासियों की मान्यता है कि माता के मंदिर में श्रद्धा से मांगने पर जरूर मन्नत पूरी होती है। इसी कारण आए दिन मंदिर परिसर में सवामणी व अन्य धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। पुजारी शंकरलाल सैनी व भक्त मुरलीधर शर्मा ने बताया कि करीब तीन सौ वर्ष पहले चामुण्डा माता की प्रतिमा मोर गांव के तालाब मध्य स्थित बगरू (टीला) पर स्थापित थी।

बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि तात्कालीन समय में गांव में चोरों के आने पर प्रतिमा चामुण्डा मां आवाज देकर ग्रामीणों को जगाती थी। इससे चोरों को चोरी में असफलता मिलती थी। इसी से परेशान, चोरों ने एक दिन योजनाबद्ध होकर बगरू से माता की प्रतिमा को उठाकर गांव से दूर विरान जंगल में ले जाने लगे। माता के आवाज लगाने पर राजपूत, गोस्वामी, दाधीच ब्राह्मण व गुर्जर समुदाय के प्रतिष्ठित व्यक्ति हथियार लिए चोरों का पीछा किया।

गांव से करीब डेढ़ किमी. दूर पथराज रोड पर चोरों से मुकाबला हुआ। जहां चोर चामुण्डा माता की प्रतिमा को छोडकऱ भाग छूटे। तब से चामुण्डा माता का मंदिर लोगों के लिए आस्था का केन्द्र बन गया है। जहां वर्तमान में भव्य मंदिर व धर्मशाला का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इधर, नवरात्र में सुबह व शाम युवक-युवतियां व महिला पुरुष पैदल मंदिर पहुंच कर मंगल आरती में सैकड़ों की संख्या में शामिल होते है। समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए मोर से माताजी तक प्रकाश के लिए लाइट लगाने के साथ मंदिर में रंगीन रोशनी से विशेष सजावट की है।