
मुनि पुंगव के जयकारों से गूंज उठा पाण्डाल , जुलूस में झांकियों से अटा आवां
बंथली. अपनों का चेहरा जो देखते थकता नहीं उसे मां, और जो भगवान का चेहरा देखते नहीं थकता उसे भक्त बोलते हैं। रागी व्यक्ति अपनी प्रियतमा का चेहरा देखते थकता नहीं। बार-बार उस चेहरे को देखने का भाव करता है। जिंदगी के अंतिम क्षण तक और मरण कर जाए तो मुर्दे का भी एक बार चेहरा देखने का भाव आता है।
व्यक्ति मर जाता है फिर भी उसको जलाने नहीं ले जाते, क्यो उसका बेटा, भाई, बहन, पति या कोई आ रहा है। अरे जिंदगी भर चेहरा देखा अब मुर्दे का क्या चेहरा देखना, लेकिन भाव जागता है।
ये बात मुनि पुंगव सुधासागर ने सुदर्शनोदय तीर्थ क्षेत्र आवां में श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में चल रहे दो दिवसीय पाठशालाओं के विद्यार्थी-शिक्षक अधिवेशन के समापन समारोह में रविवार श्रद्धालुओं को प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि है भगवान आपकी मुद्रा ऐसी है जो पलक झपकाने का भाव नहीं होता।
ऐसे ही जिनेन्द्र भगवान की भीतराग मुद्रा को देख पलक झपकाना भूल जाओ की पलक झपकाना है। आंखें फटी की फटी रह जाए कभी तृप्ति का अनुभव नहीं हो। ऐसी आत्मीयता का भाव तुम्हें भगवान की भक्ति से जोड़ उनका सामिप्य प्राप्त करने का शोभाग्य मिलेगा। साथ ही विद्यार्थी जीवन कच्चे घड़े के समान होता है।
शिक्षक कुम्भकार होता है। वह जैसा चाहे घड़े (विद्यार्थी) को रूप में ढाल सकता है। शिक्षक रूपी कुम्भकार विद्यार्थियों में ऐसे संस्कार व ज्ञान का उदय करे कि वह भारत भूमि की शान बन जाए। मंदिर समिति के चन्द्रप्रकाश हरसोरा, मुकेश ठग ने बताया कि प्रवचन उपरान्त मंगल-गीतों व जयकारों के बीच मुनि सुधासागर की आहारचर्या हुई।
आहारचर्या के पुण्र्याजक पटेलनगर (देवली) निवासी चांदमल, मनोजकुमार जैन परिवार रहे।
सामयिक के बाद देशभर से आए विद्यार्थियों-शिक्षकों व श्रद्धालुओं ने श्रीफल भेंटकर मुनि का आशीर्वाद लिया। दोपहर को समारोह के समापन पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों व शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस दौरान पाण्डाल मुनि के जयकारों से गूंज उठा।
शाम को आयोजित जिज्ञासा समाधान शिविर में मुनि ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया। सुबह श्रद्धालुओं ने मंदिर में भगवान का अभिषेक कर शांतिधारा की। अशोक धानोत्या, दुर्लभ जैन, ओमप्रकाश ठग, पवनकुमार जैन, रमेश गोयल, पारस सामरिया भी मौजूद थे।
बैण्डवादन किया
श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीर्थ क्षेत्र में चल रहे दो दिवसीय पाठशालाओं के विद्यार्थी-शिक्षक अधिवेशन के समापन समारोह में सुबह आवां कस्बा स्थित श्रीशांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से मुनि पुंगव सुधासागर के सान्निध्य में जुलूस शुरू हुआ। जुलूस में देशभर से आए पाठशालाओं के विद्यार्थियों के स्वयं की ओर से किए बैण्डवादन पर चल रहे भजनों से कस्बा धर्ममय हो गया।
उनकी ओर से सजाई अलग-अलग झांकियों से कस्बा अट सा गया। जुलूस में शामिल हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने तीर्थ पर कुंभ सा माहौल कर दिया। पुण्र्याजकों ने जुलूस पर पुष्प वर्षाकर समारोह को यादगार बना दिया। समिति के आशीष शास्त्री, संजय छाबड़ा ने बताया कि अधिवेशन के समापन समारोह में समिति की ओर से पाठशाला अध्यक्ष, संयोजक, मंत्री, शिक्षकों का सम्मान किया गया।
प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहे विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया। साथ ही आए सभी विद्यार्थियों को भी समिति की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया। अधिवेशन में अशोकनगर, खनियाधाना, पटनागंज-रहेली, गंज बासोड़ा, गुना, सागर (मध्यप्रदेश), भानगढ़, ललितपुर, टूंडला (उत्तरप्रदेश), बड़ोदरा (गुजरात), कर्नाटका सहित निवाई, पचेवर, देवली, कैकड़ी, सिंगोली, बोराव, बिजोलिया, बारंा, त्रिमूर्र्ति कॉलोनी कोटा, जयपुर की 152 पाठशालाओं के तीन हजार विद्यार्थियों-शिक्षकों सहित श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
मानस्तम्ब महाभिषेक में उमड़े श्रद्धालु
निवाई. सन्त निवास नसियां जैन मन्दिर में मुनि मार्दवनन्दी एवं आर्यिकारत्न आदिमति, श्रुतमति व सुबोधमति के सान्निध्य में सिद्ध चक्र मण्डल विधान का समापन रविवार को मानस्तम्ब महाभिषेक के साथ किया गया। इसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौला ने बताया कि सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में मान स्तम्भ जिनबिम्ब मस्तकाभिषेक एवं शिखर कलशारोहण को लेकर सुबह भगवान मूलनायक शान्तिनाथ की पूजा-अर्चना की गई। इसमें प. सुरेश शास्त्री के मंत्रोचार द्वारा श्रद्धालुओं ने अभिषेक शांतिधारा कर पूजा-अर्चना की।
मानस्तम्ब जिनबिम्ब महाभिषेक को लेकर पात्रों का चयन किया गया। इसमें महेन्द्रकुमार, अशोक कुमार ठोल्या, महावीरप्रसाद, मुकेश कुमार, अनिलकुमार, प्रेमचन्द, सुशीलकुमार सोगाणी, शिखर स्वर्ण कलश कैलाशचन्द, मुकेश कुमार गिन्दोडी ने किया। महेश गिन्दोडी, प्रकाश, निर्मल जैन, दिनेश कुमार, सुशील जैन, फूलचन्द जैन, महावीरप्रसाद जैन, पदम जैन, महेन्द्र गिन्दोडी सहित कई पात्रों ने मानस्तम्ब जिनबिम्ब प्रतिमाओं का महाभिषेक किया।
इस अवसर पर भगवान पाŸवनाथ की बैण्ड-बाजे के साथ नसियां जैन मन्दिर से रथयात्रा निकाली गई। इसमें भगवान पाŸवनाथ का रथ मुख्य आकृषक का केन्द्र बना हुआ था। रथ यात्रा संत निवास नसियां मन्दिर से रवाना हुई। इसमें राजेश जैन ख्वास बने, रथ के सारथी रतनलाल जैन, चंवर ढुलाने छीतरमल गिन्दोड़ी एवं इन्द्र जैन को मिला। रथयात्रा अहिंसा सर्कल, बड़ा बाजार होते हुए दिगम्बर जैन बड़ा मन्दिर पहुंची।
जहां बैण्ड-बाजे के साथ बड़ा मन्दिर अध्यक्ष महावीरप्रसाद गोधा, सुरेश गिन्दोडी के सान्निध्य में भगवान पाŸवनाथ को वेदी में विराजमान किया। इस दौरान सिद्धचक्र विधान मण्डल में भगवान शान्तिनाथ, पाŸवनाथ एवं महावीर स्वामी की महाआरती धर्मचन्द, राकेशकुमार जैन समेत अन्य श्रद्धालुओं ने की।
Published on:
26 Nov 2018 02:40 pm
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