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न्यायालय ने अंतरिम भरण पोषण मामले में पति को दी राहत

पति-पत्नी विवाद मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट ने दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए पत्नी के 15 हजार रुपए प्रति माह अंतरिम भरण पोषण भत्ता दिए जाने के प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को खारिज किया है।  

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न्यायालय ने अंतरिम भरण पोषण मामले में पति को दी राहत

न्यायालय ने अंतरिम भरण पोषण मामले में पति को दी राहत

टोडारायसिंह. पति-पत्नी विवाद मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट ने दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए पत्नी के 15 हजार रुपए प्रति माह अंतरिम भरण पोषण भत्ता दिए जाने के प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को खारिज किया है। रतवाड़ा निवासी पूजा ने प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में बताया कि उसका विवाह कल्याणपुरा (मालपुरा) निवासी ओमप्रकाश के साथ 23 मई 2015 को हुआ था, जिसमें उसके माता-पिता एवं परिवारजनों ने दहेज दिया था। ससुराल पक्ष उसके साथ मारपीट करने लगे तथा दहेज की मांग को लेकर 25 अक्टूबर 2018 को मारपीट कर घर से निकाल दिया।

पीडि़ता ने पति को साधन संपन्न बताते हुए प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने, जमीनी पैदावार तथा मवेशियों से होने वाली आय को मद्देनजर रखते हुए 15 हजार रुपए अंतरिम भरण पोषण दिलवाने की गुहार की। पति पक्ष के जवाब में ओमप्रकाश की ओर से पैरवी में अधिवक्ता जावेद अहमद ने बताया कि विवाह में किसी प्रकार का कोई दहेज नहीं देने तथा दहेज की मांग नहीं करने की बात कही गई थी।

बल्कि उसकी पत्नी पूजा बिना कारण बताए दाम्पत्य जीवन के कत्र्तव्यों से परे जाकर अपने पीहर में रहने लगी। इस पर ओमप्रकाश ने पत्नी के विरुद्ध धारा 9 ङ्क्षहदू विवाह अधिनियम के प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने डिक्री किया जाकर पूजा को उसके पति ओमप्रकाश के साथ रहकर अपने दाम्पत्य धर्म का पालन करते हुए दाम्पत्य अधिकारों की पुन: स्थापना के आदेश दिए थे।


न्यायालय ने पत्नी के साथ पति के प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए दाम्पत्य अधिकारों की पुन: स्थापना के सबंध में जारी आदेशों के बावजूद पूजा के अपने पति के साथ दाम्पत्य जीवन का निर्वहन नहीं करने तथा अंतरिम भरण पोषण की मांग को गंभीर मानते हुए पूजा की ओर से प्रस्तुत अंतरिम भरण पोषण के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।

श्वानों के हमले से मोर को बचाया

निवाई. गांव कनेसर में राष्ट्रीय पक्षी मोर पर श्वानों ने हमला कर दिया, जिससे मोर जख्मी हो गया। वहां खड़े सुरेश यादव, सुनीता यादव, लालाराम सैनी, हेमराज सैनी ने मोर को छुड़ाकर बचा लिया। सूचना पर राजेश मौके पर पहुंचे और घायल मोर का प्राथमिक उपचार कर पानी पिलाकर दाना खिलाया। इसके बाद श्वानों के हमले में जख्मी हुए मोर की सूचना जिला वन अधिकारियों को दी। वन कार्मिक गौरीशंकर यादव पहुंचे और जख्मी मोर को पशु चिकित्सालय निवाई लेकर आए। जहां उसका उपचार करवाया और संजय वन में छोड़ दिया।