
राजमहल के समीप बनास नदी में लगे ट्यूबवैल।
राजमहल. जलदाय विभाग की अनदेखी से उपखण्ड क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत राजमहल के लोग बांध के करीब होने के बाद भी फिल्टर पानी से वंचित हैं। यहां फिल्टर प्लांट से प्रस्तावित पानी का आधा ही हिस्सा मिल रहा है। विभाग इसकी पूर्ति के लिए बनास में लगे ट्यूबवैलों से जलापूर्ति कर रहा है।
बीसलपुर-टोंक-उनियारा पेयजल परियोजना के द्वितीय चरण पर कार्य कर रहे कार्मिकों ने बताया कि राजमहल के लिए रोजाना कुल 3.5 लाख लीटर पानी आरक्षित है, लेकिन जलदाय विभाग के पास पानी स्टोरेज करने का टैंक नहीं होने से आधे से कम फिल्टर पानी की आपूर्ति हो रही है।
लोगों को बनास नदी की ट्यूबवैलों से जलापूर्ति करनी पड़ती है। ये पानी गंदला तो कभी बदबूदार आता है। उल्लेखनीय है कि जलदाय विभाग की ओर से लगभग दो वर्ष पूर्व लाखों की लागत से पानी का टैंक, सीडब्लूआर (वाटर स्टोरज टैंक) बनाकर पाइप लाइन डाली गई थी, लेकिन विभागीय अनदेखी से वाटर स्टोरेज टैंक महज 70 हजार लीटर का बना देने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बीसलपुर-टोंक-उनियारा पेयजल परियोजना में कस्बे को रोजाना 3.5 लाख लीटर पानी देना प्रस्तावित है, लेकिन स्टोरेज के अभाव में कभी दो लाख तो कभी एक लाख लीटर ही पानी लिया जा रहा है।
जलापूर्ति के लिए लगभग चार लाख लीटर पानी स्टोरेज का टैंक बनने पर ही गांव में रोजाना 3.5 लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जा सकती है, लेकिन इस ओर ना तो जलदाय विभाग ने कभी ध्यान दिया ना ही योजना के अभियंताओं ने। इससे लोग गंदला पानी पीने को मजबूर हैं।
पुराने पाइपों से उतरता जंग
फिल्टर प्लांट से पानी की आपूर्ति की जाती है तो इसमें क्लोरीन मिली होने से पाइपों में लगे जंग व कचरे को भी साफ करता है। इससे घरों में एक घंटे तक गंदले पानी की आपूर्ति होती है। योजना से जुड़े अभियंताओं ने बताया कि पुरानी पाइप लाइन बदलने के साथ ही स्टोरेज टैंक बनाए जाने पर शुद्ध जल की आपूर्ति संभव है।
Published on:
03 Dec 2017 03:11 pm
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