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घुड़दौड़ प्रतियोगिता एवं महाआरती के साथ संपन्न हुआ भगवान द्वारकाधीश का लोक सांस्कृतिक अध्यात्मिक मेला

कठमाणा के निकटवर्ती ग्राम समेलिया में भगवान द्वारकाधीश का होली पर लगने वाला 3 दिवसीय लोक सांस्कृतिक अध्यात्मिक मेला बुधवार को घुड़दौड़ प्रतियोगिता एवं महाआरती प्रसादी वितरण पर संपन्न हुआ।
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घुड़दौड़ प्रतियोगिता एवं महाआरती के साथ संपन्न हुआ भगवान द्वारकाधीश का लोक सांस्कृतिक अध्यात्मिक मेला

घुड़दौड़ प्रतियोगिता एवं महाआरती के साथ संपन्न हुआ भगवान द्वारकाधीश का लोक सांस्कृतिक अध्यात्मिक मेला

पीपलू. कठमाणा के निकटवर्ती ग्राम समेलिया में भगवान द्वारकाधीश का होली पर लगने वाला 3 दिवसीय लोक सांस्कृतिक अध्यात्मिक मेला बुधवार को घुड़दौड़ प्रतियोगिता एवं महाआरती प्रसादी वितरण पर संपन्न हुआ। घुड़दौड़ प्रतियोगिता प्रभारी समेलिया के राम अवतार बलाई ने बताया कि घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं में बिशालू, चौसला, माधोराजपुरा, डिडावता, दूदू, कठमाणा, अजमेरी, समेलिया, कलवाड़ा समेत टोंक, जयपुर जिले के कई के अश्व पशु पालकों ने शिरकत की।

उन्होंने बताया कि हर बार ग्राम पंचायत किशोरपुरा के तत्वावधान में भगवान द्वारकाधीश का मेला तथा घुड़ दौड़ प्रतियोगिताओं के आयोजन होते थे, लेकिन इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली। ऐसे हालात में पशुपालकों का उत्साहवर्धन करने को लेकर यह आयोजन मेला समाप्ति के दौरान स्थानीय स्तर पर ही किया गया।

घुड़ दौड़ प्रतियोगिता के दौरान घोड़ा घोड़ी नृत्य, घोड़ी चाल, घुड़दौड़ के आयोजन हुए, जिसमें घोड़ा नृत्य में कालू खटीक प्रथम एवं गोपाल खटीक कलवाड़ा द्वितीय स्थान पर अव्वल रहा। इसी तरह घोड़ा घोड़ी चाल में मुकेश चौधरी निवासी चौसला प्रथम, बहादुर सिंह निवासी अजमेरी का घोड़ा द्वितीय तथा देवराज गुर्जर बिशालू तृतीय स्थान तथा घुड़दौड़ में गणेश चौधरी चौसला प्रथम, मुकेश चौधरी द्वितीय व मदन सिंह रामदेव जी की ढाणी डिडावता तृतीय स्थान पर अव्वल रहे। सभी को पुरस्कृत किया गया।

मस्तकाभिषेक किया
बनेठा. उप तहसील क्षेत्र स्थित ग्राम ककोड़ में श्वेतांबर जैन मंदिर में नवीन जिनालय जिनबिम्ब प्रतिमा स्थापना की तृतीय वर्षगांठ महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर प्रात: भगवान का मस्तकाभिषेक किया गया एवं 70 भेदी पूजन विधान पूर्वक किया गया। इसके पश्चात नवीन ध्वजा अपने सिर पर धारण कर सकल जैन समाज ककोड़ के सान्निध्य में बैण्ड बाजे के साथ जुलूस निकालते हुए जिनालय पहुंचे एवं विधि-विधान पूर्वक जिनालय के शिखर पर नवीन ध्वजा का आरोहण किया गया।

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