
फिर से 'सुनहरे' रूप में नजर आएगी विख्यात सुनहरी कोठी
फिर से 'सुनहरे' रूप में नजर आएगी विख्यात सुनहरी कोठी
सुनहरी कोठी का होगा जिर्णोद्धार
पुरातत्व विभाग कर रहा है देखरेख
अभी मिला डेढ़ करोड़
सरकार से और आएगा बजट
जलालुद्दीन खान
टोंक. नजरबाग स्थित सुनहरी कोठी और घंटाघर के समीप ऐतिहासिक तेलियान तालाब का जिर्णोद्धार पुरातत्व विभाग करेगा। विश्व विख्यात सुनहरी कोठी को वो ही रूप दिया जाएगा, जैसा उसे बनाया गया था।
पुरातत्व विभाग की ओर से ऐतिहासिक व विख्यात सुनहरी कोठी का कुछ कार्य कराया भी है, लेकिन अभी और कार्य बाकी है। विभाग की ओर से कोठी की चारदीवार को ऊंचाकर कर गार्डन बनाया गया है।
वहीं गार्डन में फुलवारी व पानी के फंव्वारे बनवाए गए हैं। वहीं पुरातत्व विभाग की ओर से ऐतिहासिक तालाब का भी सौन्दर्यकरण कराया जाएगा। इसके लिए विभाग को सरकार को और से अभी डेढ़ करोर रुपए मिला है।
विभाग सरकार से और बजट लेगा और कोठी को वो ही रूप देगा। फिलहाल विभाग कोठी में लगे फूल-पत्ती व कलर बनाने वाले विशेषज्ञों की तलाश कर रहा है।
गौरतलब है कि सुनहरी कोठी का निर्माण पूर्व टोंक रियासत के प्रथम नवाब मोहम्मद अमीर खां उर्फ अमीरुद्दोला खां ने 1824 में कराया था। बाद के नवाब इब्राहिम अली खां ने कोठी में सोने-चांदी की नक्काशी कराई।
एक जीना (सीढिय़ां) तथा छोटे-बड़े दस दरवाजे वाली कोठी के दरवाजों को रंगीन कांच पर सुनहरी काम के साथ इस खूबी से बनाया गया कि ढलते सूरज की रोशनी महल में प्रवेश कर प्रतिदिन इन्द्रधनुष बनाती थी और पूरा महल रोशनी से नहा उठता था।
कोठी की दीवार एवं छतों को भी सोने के पानी से बने बेलबूटे, फूल, गुलदस्ते अलग ही छटा बिखेरते प्रतीत होते हैं। महल के एक हिस्से की भीतरी दीवारों पर जड़े छह शीशे पूरी कोठी का नजारा एक ही कोण से दिखाने में सक्षम हैं।
जहां ये शीशे लगे हुए हैं, उस हिस्से को शीश महल नाम से जाना जाता था। सुनहरी कोठी में सोने-चांदी के काम तथा अन्य नक्काशी का अब नामों-निशान ही बचा है। इसे सहेजा जा रहा है। एक दशक पहले इस कोठी को विभाग ने अपने अधीन लेने के बाद बंद कर दिया था।
फिलहाल कोठी पर ताला लगा रहता है, जहां सुरक्षाकर्मी और देखरेख के लिए महिला को तैनात किया गया है। वहीं तेलियान तालाब भी नवाबी रियासत से जुड़ा हुआ है।
इधर, नगर परिषद के आयुक्त सचिन यादव ने बताया कि पुरातत्व विभाग ने सुनहरी कोठी में निर्माण कार्य कराया है। सूचना है कि ऐतिहासिक तेलियान तालाब का सौन्दर्यकरण भी पुरातत्व विभाग कराएगा, लेकिन इसकी अभी पुख्ता सूचना या किसी प्रकार का कोई आदेश नहीं मिला है।
फिलहाल नहीं आते थे टोंक पर्यटक
जिले में यूं तो पयर्टन की असीम सम्भावनाएं हैं, लेकिन फिलहाल यहां पयर्टक नहीं आते हैं। जिला मुख्यालय स्थित सुनहरी कोठी उसकी कला के लिए विख्यात है, लेकिन उसके जिर्णोद्धार नहीं होने और ताला लगा होने पर कोई उसे देख नहीं सकता है।
जब इसका कार्य पूरा हो जाएगा तो इसे देखन के लिए पर्यटक आएंगे। टोंक में मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान के बाद पर्यटक सुनहरी कोठी भी आ सकेंगे।
बजट मिला है काम होगा
सुनहरी कोठी और तालाब के लिए सरकार से डेढ़ करोड़ रुपए का बजट मिला है। सुनहरी कोठी को वैसा का वैसा ही रूप दिया जाएगा। इसके लिए कारीगरों की तलाश जारी है।
- मुकेश शर्मा, अधिशासी अभियंता पुरातत्व विभाग अजमेर
Published on:
27 Dec 2020 09:32 pm
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