
क्षेत्र में चारे के भाव आसमान पर, पशु पालक चिंतित
क्षेत्र में चारे के भाव आसमान पर, पशु पालक चिंतित
कमर तोड़ मंहगाई
अनिल पारीक
निवाई. क्षेत्र में एक दशक से लगातार गिरते जल स्तर से जहां पानी की कमी हो रही है वहीं चारे का उत्पादन बहुत कम होने से चारे के भाव आसमान छू लगे है। जिससे किसानों व पशुपालकों के सामने पशुओं को रखने की भीषण समस्या उत्पन्न हो गई है। यदि चारे के भाव इसी तरह बढ़ते रहे तो किसान व पशुपालक अपने पशुओं को छोडऩे के विवश होना पड़ेगा।
क्षेत्र में जहां गत वर्ष चारे का अभाव 600 से 750 रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल थे। वहीं इस समय चारा 1150 से 1400 रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल के भाव से बिक रहा है। किसान विक्की जाट ने बताया कि क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कुंओं का पानी सूख गया है, जिसके चलते किसानों ने गेहूं, जौ एवं अन्य चारे की फसले नहीं बोई है।
जिससे चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है और पशुपालकों और किसानों को चारे के लिए गांव-गांव भटकना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि राम के रूठने के साथ-साथ राज भी रूठता जा रहा है। चारे की गंभीर समस्या को देखते हुए तत्काल प्रभाव से जगह-जगह सरकार को चारा डिपो खोलकर पशुधन को बचाया जा सकती है।
गायों की सबसे ज्यादा दुर्दशा: क्षेत्र में करीब 5-6 गौशालाएं होने के बावजूद भी गायों के झुण्ड इधर-उधर चारे के लिए भटकते दिखाई देते है। चारे के भाव आसमान छूने से पशुपालक भी गायों पर ध्यान नहीं देते है जिससे क्षेत्र में गायों की सबसे दुर्दशा हो रही है।
पहले भी खोले थे चारा डिपो
राज्य सरकार ने करीब 11 वर्ष पूर्व प्रदेश चारे की किल्लत को देखते हुए अन्य राज्यों से सस्ते दामों पर चारा खरीद कर पशुओं को बचाने के लिए जगह जगह चारा डिपो खोले थे।
खड़ी फसल का सौदा
किसानों ने बताया कि क्षेत्र में चारे की समस्या इतनी विकट हो गई है लोग चारे के लिए गेहूं, जौ के खेत में खड़ी फसलों का सौदा कर रहे हैं, किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर चारा व्यापारी कम दामों पर चारा खरीद रहे है।
महंगाई पर लगे लगाम
किसानों ने बताया कि मंहगाई पर सरकार का अंकुश नहीं होने से किसानों के सामने से परिवार पालने के लाले पड़े हुए है साथ ही पशुओं को चारा खिलाने की समस्या भी उत्पन्न हो गई है। ऐसे में महंगे चारे के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
खाखले की हो रही है कालाबाजारी: खाखला व्यापारी दूर-दराज से सस्ते दामों खाखला खरीदकर दोगुने दामों में बेच रहे है जिससे क्षेत्र में खाखले की जमकर कालाबाजारी हो रही और चारे के व्यापारी बिना लाईसेंस के व्यापार कर राजस्व हानि कर रहे है।
गेहूं की पैदावार कम: क्षेत्र में बीस दशकों से लगातार गेहूं की जगह सरसों की फसल बोई जा रही है जिसके कारण भी चारे की कमी हो रही और चारे के भाव बढ़ते जा रहे है।
Published on:
06 May 2022 05:04 pm
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