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video: ओपीडी के नही खुले ताले, बिना परामर्श व उपचार के लौटे मरीज

राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में निजी अस्पतालों की चल रही हड़ताल को राजकीय सेवारत चिकित्सकों की और से दिए गए समर्थन में जिलें के राजकीय अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सक बुधवार को एक दिन के सामुहिक अवकाश पर रहे। इस दौरान ओपीडी के ताले नही खुलने से मरीज बिना परामर्श व उपचार के वापस लौटे गए।

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टोंक. राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में निजी अस्पतालों की चल रही हड़ताल को राजकीय सेवारत चिकित्सकों की और से दिए गए समर्थन में जिलें के राजकीय अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सक बुधवार को एक दिन के सामुहिक अवकाश पर रहे। इस दौरान ओपीडी के ताले नही खुलने से चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हुई। जिससे इलाज के मरीज को इधर-उधर भटकना पड़ा। आपातकालीन को छोडकऱ अस्पताल में कोरोना के समय की तरह पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। निजी अस्पतालों की हड़ताल व सरकारी चिकित्कों के अवकाश की खबरों के चलते अस्पतालों में आने वाले मरीजों का आंकड़ा भी काफी कम रहा।


चिकित्सकों के अवकाश के कारण अस्पताल केवल इमरजेंसी वाले मरीजों को ही देखा गया। इसके अलावा साधारण बिमारीयों व पुराने उपराधीन मरीजों को बिना परामर्श के लौटना पड़ा। अवकाश के दौरान ड्यूटी पर चिकित्सक की और से पेट दर्द व गायनी के मरीज को सोनोग्राफी की जांच नही लिखी गई जिससे मरीज को बिना सोनाग्राफी के लौटना पड़ा। हालांकि सोनाग्राफी यूनिट खुली जरूर थी लेकिन रेडियोलाजिस्ट नही आए।

राजकीय सआदत अस्पताल टोंक में कार्यरत 50 चिकित्सकों में से 11चिकित्सक तथा राजकीय मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र टोंक में 24 कार्यरत चिकित्सकों में से 11 चिकित्सक रोजाना की तरह अपनी ड्यूटी पर पहुंचे। वही चिकित्सकों की हड़ताल को ध्यान में रखते हुए 8 चिकित्सक अन्यत्र जगह से टोंक अस्पताल में लगाए गए थे जिसमें से 5 चिकित्सक ही अपनी ड्यूटी देने पहुंचे।

राजकीय सआदत अस्पताल टोंक में पीएमओ डॉ बीएल मीणा, डिप्टी कंट्रोलर डॉ चेतन जैन के अलावा मेडिकल विशेषज्ञ डॉ, बीएल नामा, सर्जिकल से यशवंत नामा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एसएन चौधरी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश कुशवाह, गायनी विभाग से डॉ सुनीता राजोरा व डॉ प्रिया आदि ने मरीजों का इलाज किया।

राजकीय सआदत अस्पताल टोंक में आईपीडी के 62 रोगियो, ओपीडी के 10 तथा राजकीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में 30 रोगियों की जांचे की गई। वही ब्लड बैंक से 5 मरीजों को इमरजेंसी में ब्लड उपलब्ध कराया गया। दोनों ही अस्पतालों में सोनोग्राफी रूम के ताले तो खुले लेकिन किसी भी चिकित्सक ने सोनोग्राफी नही लिखी जिस कारण एक भी सोनोग्राफी नही हुई।

इतना ही नही कुछ समय के लिए ओपीडी की पर्ची काउंटर से दी गई लेकिन बाद में ओपीडी काउंटर पर्ची को बंद करके इमरजेंसी काउंटर से मरीजों को पर्ची दी गई। राजकीय सआदत अस्पताल टोंक में वार्डो में भर्ती 40 रोगियों के एक्स-रे किए गए।

कार्यवाहक सीएमएचओ डॉ श्यामसुदर अग्रवाल ने बताया की राजकीय सआदत अस्पताल टोंक को छोड़ करके जिले में 31 प्रशिक्षु सहित कुल 163 चिकित्सक कार्यरत है जिनमे से बुधवार को 111चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहे तथा 50 चिकित्सकों ने अपनी ड्यूटी दी उन्होंने बताया कि जिले में इमरजेंसी में चिकित्सा की गई।