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video:  Doctor strike: भटकते रहे बीमार तो परेशान तीमारदार , पटरी पर नहीं आई स्वास्थ्य सेवाएं

जिला अस्पताल में 55 के मुकाबले सात चिकित्सकों पर मरीजों का भार है। इनमें भी पांच आयुर्वेद चिकित्सक हैं।

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चिकित्सकों की हड़ताल

टोंक. सेवारत चिकित्सक संघ से जुड़े चिकित्सकों की हड़ताल के चलते जिले में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है।

टोंक. सेवारत चिकित्सक संघ से जुड़े चिकित्सकों की हड़ताल के चलते जिले में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। चौंकाने वाली बात है कि जिला अस्पताल में 55 के मुकाबले सात चिकित्सकों पर मरीजों का भार है। इनमें भी पांच आयुर्वेद चिकित्सक हैं। ऐसे में गम्भीर रोगियों को रैफर किया जा रहा है।

सर्वाधिक परेशानी निर्धनों को उठानी पड़ रही है। निजी अस्पतालों में जाने से उन्हें जांच व परामर्श पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। प्रमुख चिकित्साधिकारी नहीं होने से सीटी स्कैन आदि जांच भी नहीं हो पा रही। पहले ही दिन से तीन को छोड़ अन्य कोई चिकित्सक पुलिस के हाथ अब तक नहीं लगा।

मांगों को लेकर आन्दोलनरत चिकित्सक चौथे दिन मंगलवार को भी अस्पतालों में नहीं पहुंचे। इससे दूरदराज से आए बीमार भटकते रहे तीमारदार भी परेशान रहे। सआदत अस्पताल में डॉ. निसर्ग कुलश्रेष्ठ व शंकरसिंह गौड़ समेत पांच अन्य आयुर्वेद चिकित्सकों ने मोर्चा सम्भाल रखा है।

इसी प्रकार मातृ शिशु अस्पताल से सेवानिवृत्त स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता माहेश्वरी, डॉ. आशु गुर्जर, दीपा शर्मा ने महिलाओं को परामर्श दिया। वार्डों में भर्ती मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों के नहीं होने से बिना छुट्टी कराए ही घरों को लौट गए। आउटडोर का आंकड़ा भी डेढ़ हजार से घटकर पांच सौ का रह गया।

मेडिकल व गहन चिकित्सा इकाई में एक भी रोगी भर्ती नहीं है। सर्जिकल वार्ड में इक्के-दुक्के मरीज भर्ती हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ रही। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति रामभरोसे रही। नर्सेज व आयुर्वेद चिकित्सकों ने दवा देकर काम चलाया।

सूने रहे जांच केन्द्र
सआदत अस्पताल में संचालित जांच केन्द्र भी सूने रहे। आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सकों की ओर से परामर्श तो दिया गया, लेकिन जांच नहीं लिखी गई। इससे लैबकर्मियों पर अन्य दिनों की अपेक्षा भार कम रहा। यही स्थिति मातृ एवं स्वास्थ्य अस्पताल स्थित केन्द्र की थी।

बंथली. चिकित्सकों की हड़ताल के चलते मरीज परेशान हैं। हालांकि दंत व आयुर्वेद चिकित्सक उपचार कर परामर्श दे रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ का अभाव खटक रहा है। मरीजों को देवली, टोंक व जयपुर के निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ रहा है।

प्रसूता व शिशु वार्ड भी खाली
चिकित्सकोंं की हड़ताल के चलते प्रसव का आंकड़ा भी काफी गिर गया। आलम यह है कि मंगलवार को महज दो सामान्य प्रसव किए गए। गत चार दिनों में कुल २१ सामान्य प्रसव किए जा सके। इससे पहले जनाना अस्पताल में प्रतिदिन ३५ से ४० सामान्य व दो से तीन जटिल प्रसव होते रहे हैं।

एसडीओ ने दिलाई राहत
प्रमुख चिकित्साधिकारी के नहीं होने से सआदत अस्पताल आए रोगियों की सीटी स्कैन जांच भी नहीं हो पाई। इसका कारण यह था कि रोगी पर्ची पर पीएमओ के हस्ताक्षर आवश्यक है। ऐसे में सीटी स्कैन समेत अन्य कामकाज अटके रहे। बाद में मरीजों की शिकायत पर एसडीओ प्रभातीलाल जाट ने अस्पताल का निरीक्षण किया। जिला कलक्टर से बात कर नई व्यवस्था होने तक वरिष्ठ सर्जन शंकर सिंह गौड को काउण्टर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत कराया। इसके बाद ही सीटी स्कैन समेत अन्य कार्य हो सके। एसडीओ ने जनाना अस्पताल समेत सआदत अस्पताल की अन्य व्यवस्थाएं भी देखी।