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ये कैसा हाईटेक सिस्टम!, अस्पताल तीन, सुविधा एक में

शहर में सआदत अस्पताल समेत तीन बड़े अस्पताल हैं। जबकि एक्स-रे सुविधा महज सआदत अस्पताल में ही उपलब्ध है।

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 एक्स-रे मशीन

टोंक के सआदत अस्पताल में पंखे के नीचे सूखता एक्स-रे।

टोंक.

चिकित्सा क्षेत्र ने भले चाहे तरक्की कर ली, लेकिन सआदत अस्पताल में आज भी मरीजों के एक्स-रे हाथ से धोए व सुखाए जा रहे है। इसका कारण गत दिनों एक्स-रे रूम में लगी आग में एक्स-रे ‘फिल्म ऑटो प्रोसेसर मशीन’ का जल जाना है। इससे मरीजों को एक्स-रे लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

आलम यह है कि एक्स-रे मिलने तक चिकित्सकों के घर लौटने का समय हो चुका होता है। मशीन होने पर तो 5 से 10 मिनट में मरीजों को एक्स-रे उपलब्ध हो रहे थे। उल्लेखनीय है कि एक्स-रे सुविधा जब से सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क की गई है तब से एक्स-रे व सोनोग्राफी कराने वालों की संख्या कई गुनी हो चली है। रेडियोग्राफरों के मुताबिक योजना शुरू होने से पहले 25-30 एक्स-रे प्रतिदिन होते थे। अब ये संख्या छह गुना तक बढ़ गई है।


अब आ रही परेशानी
एक्स-रे यूनिट में लगी फिल्म ऑटो प्रोसेसर मशीन गत दिनों शॉर्ट सर्किट से लगी आग में जल गई। जबकि यह मशीन एक्स-रे की धुलाई व सुखाने में उपयोगी साबित हो रही थी। इससे मरीजों को हाथों-हाथ एक्स-रे फिल्म उपलब्ध हो जाती थी। अब मशीन के अभाव में एक से डेढ़ घंटे बाद मरीजों को एक्स-रे मिल पा रहे हंै। जब तक हड्डी रोग विशेषज्ञ घरों को जा चुके होते हैं।


सुविधा महज सआदत में
शहर में सआदत अस्पताल समेत तीन बड़े अस्पताल हैं। जबकि एक्स-रे सुविधा महज सआदत अस्पताल में ही उपलब्ध है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल में एक्स-रे यूनिट तो बना दी गई, लेकिन सुविधा शुरू नहीं की गई। इससे मरीज फेरा लगाने पर विवश हैं। हालात यह है कि शहर के टीबी अस्पताल आ रहे मरीज भी एक्स-रे कराने के लिए सआदत अस्पताल जाने पर विवश हैं। जबकि टीबी अस्पताल में ही सुसज्जित एक्स-रे कक्ष समेत अन्य सभी सुविधाएं मौजूद है।

नई मशीन उपलब्ध कराएं
मेडिकल रिलीफ सोसायटी सदस्य मनीष तोषनीवाल एवं सतर्कता समिति सदस्य दुर्गेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल प्रबन्धन को जली मशीन के स्थान पर नई मशीन लगवानी चाहिए, जिससे दूर देहात से आए मरीजों को एक्स-रे के लिए परेशान नहीं होना पड़े।

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