
राजमहल. बनास नदी में नियमों को ताक में रखकर बजरी का खनन किया जा रहा है। साथ ही बजरी भरकर कस्बे व गांवों के मुख्य मार्गों से तेज गति से दौड़ते बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से नाराज ग्रामीणों ने रविवार को बनास नदी में प्रदर्शन किया।
साथ ही बजरी पेडों के रास्तों में खाइयां खोद दी। इस दौरान खनन करने वाले व ग्रामीणों के बीच विवाद भी हो गया, लेकिन लोगों समझाइश से मामला शांत हुआ।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि खनिज विभाग के अभियंताओं की अनदेखी से बनास नदी में नियमों के विपरीत अंधाधुंध बजरी का खनन किया जा रहा है।
इसको लेकर कई बार जिला प्रशासन व खनिज विभाग के अभियंता से शिकायत भी की, लेकिन लापरवाही बरती जा रही है।इसके चलते नियमों के विपरीत चल रहा बजरी का खनन बंद नहीं हो रहा है।
कस्बे के मुख्य मार्गों से तेज गति से दौड़ते बजरी से ओवरलोड भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से आए दिन दुर्घनाएं हो रही है। इससे नाराज ग्रामीणों ने बनास के रास्तों पर खाइयां खोदकर प्रदर्शन किया है।
दूसरे दिन भी लगाया जाम
बंथली ञ्च पत्रिका. बनास नदी से बजरी परिवहन कर रहे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रॉयल्टी के नाम पर ली जा रही अधिक राशि को लेकर रविवार को भी लामबंद चालकों ने बंथली मार्ग पर जाम लगा दिया।
इससे मार्ग में वाहनों की कतारें लग गई। मौके पर पहुंंचे विजेन्द्र सिंह, कुलदीपसिंह, कांग्रेस प्रदेश सचिव कुलदीपसिंह व दूनी थानाप्रभारी लक्ष्मणसिंह नाथावत ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन चालक राशि कम करने को लेकर अड़ गए।
इससे शाम तक समाधान नहीं हो पाया। बाद में ग्रामीणों ने बनास में बजरी भरने आई टै्रक्टर-ट्रॉलियों को खदेड़ दिया। गौरतलब है कि ट्रैक्टर चालकों ने शनिवार को भी जाम लगाया था।
इधर, उपसरपंच सत्यनारायण सैनी, राधेश्याम पारीक, गोपालसिंह हाड़ा, सत्यनारायण चौधरी आदि ने बताया कि राजमहल से जगत्या तक बनास नदी क्षेत्र से बजरी रॉयल्टी करीब सात दिन से 600 से लेकर 800 रुपए तक की राशि
वसूली जा रही है। इसको लेकर गत दिनों मुख्यमंत्री तक भी शिकायत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इस दौरान कैलाश कलवाडिय़ा, जगदीश, राजेश आदि मौजूद थे।
इधर, कुलदीपसिंह ने बताया कि बनास नदी में नियम विरुद्ध हो रहे बजरी खनन से पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है।
Published on:
13 Feb 2017 09:13 am
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