
जमींदोज हुए पहाड़, गड्ढों में बदली बनास, रोक के बाद भी लगातार जारी है बजरी व पत्थर का खनन
जलालुद्दीन खान
टोंक. प्रशासन की अनदेखी के चलते जिले की पहाडिय़ां खनन की भेंट चढ़ चुकी हैं। यहां इतना खनन किया जा चुका है कि जो पहाड़ दो दशक पहले तक 500 से 1000 फीट ऊंचे थे, वो अब धरती में समा गए हैं। वहीं खननकर्ताओं ने बनास नदी को भी छलनी कर दिया है। बेहिसाब किए गए खनन से सपाट दिखने वाली बनास नदी अब गड्ढों में तब्दील हो गई है।
दूसरी तरफ खननकर्ताओं ने पहाड़ों पर करीब 30 से 40 मीटर गहराई तक खनन कर पत्थर निकाल लिए हैं। आसमान छूते कई पहाड़ों के अब अवशेष नजर आ रहे हैं। अभी भी कई पहाड़ों पर खनन जारी है। इतना ही नहीं खननकर्ता निवाई स्थित अरावली पर्वतमाला शृंखला पर भी खनन करने से नहीं चूक रहे हैं। शृंखला की पहाडिय़ों पर भी खनन जारी है। शृंखला से जुड़ी कई पहाडिय़ों पर इतना खनन हो चुका है कि वह सपाट नजर आने लगी है।
यहां गायब हो गए पहाड़
जिले में सर्वाधिक पत्थरों का खनन देवली ब्लॉक में होता है। देवली क्षेत्र के चांदली माता मंदिर के समीप तीन पहाडिय़ों पर इतना खनन हुआ कि उनके नामों-निशान मिट गए। पत्थर के लालच में खननकर्ताओं ने इनको कई मीटर गहरी खाइयों में तब्दील कर दिया।
इसके अलावा आवां, टोकरावास, घाड़, डाटुंदा, चांदसिंहपुरा, चारनेट, गेरोटा, निवारियां, खरोई समेत दो दर्जन गांवों से सटी पहाडि?ां जमींदोज हो चुकी है। पहाडिय़ों में इस कदर खनन कर दिया कि उनमें आरपार रास्ते तक निकल आए हैं।
यहां भी कम नहीं खनन
वन क्षेत्र टोंक, मालपुरा तथा टोडारायसिंह में पहाड़ों पर खनन जारी है। प्रतिदिन दर्जनों की तादाद में पत्थर से भरे ट्रक गुजर रहे हैं। वन विभाग कभी कभार फोरी कार्रवाई करता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अवैध रूप से किए जाने वाले खनन पर नियमित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
भुगतना होगा असर
- खनन से उठने वाले धुएं तथा मिट्टी से चर्म रोग तथा अस्थमा रोग का खतरा।
- वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
- मानसून पर भी होगा प्रभाव।
- भू-गर्भ स्थित पानी का स्तर में भी गिरावट।
- खनन से रेगिस्तानी क्षेत्र भी बढ़ रहा है।
- जमीन बंजर होती जा रही है।
- खेती करना भी हो जाएगा मुश्किल।
90 प्रतिशत कुएं चढ़े खनन की भेंट
बनास नदी में अंधा-धुंध किए गए बजरी खनन से जलदाय विभाग के 90 प्रतिशत कुएं क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालांकि पहले भी तीन साल पहले जनवरी 2016 में इन कुओं के समीप अस्थायी चौकी लगाई गई थी, लेकिन उसे कुछ दिनों बाद ही हटा लिया गया।
इसके चलते नदी में अवैध रूप से खनन करने वालों ने कुओं को क्षतिग्रस्त करना शुरू कर दिया। वर्तमान हालात की बात की जाए, तो बजरी खनन 16 नवम्बर 2017 से बंद है, लेकिन चोरी-छिपे बजरी का खनन जारी है। इसके लिए जिला कलक्टर ने टीमों का गठन किया, लेकिन टीमें फोरी कार्रवाई कर रही है।
ऐसे में खनन पर अंकुश नहीं लग रहा है। इसके चलते बजरी खनन का खमियाजा शहर के उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा। कुओं की सुरक्षा नहीं की गई तो शहर की करीब पौने दो लाख आबादी को दो दिन में मिल रहा पानी तीन दिन में नसीब होगा।
बरसात के बीच खनन जारी
खननकर्ता बरसात व पानी के बीच भी खनन कर रहे हैं। जबकि रोक की अवधि से अब तक 1797 वाहन अगस्त माह तक जिले में पकड़े जा चुके हैं, जिनसे 11 करोड़ 44 लाख दो हजार 56 9 रुपए की वसूली की जा चुकी है। ये तो एक बानगी है। इससे अधिक वाहन जिले से बाहर निकलने के बाद अन्य जिलों में पकड़े गए हैं। वहीं जिले के थानों में करीब तीन करोड़ की बजरी के ढेर लगे हुए हैं।
यह है जुर्माने की प्रक्रिया
खनिज विभाग के अभियंताओं के अनुसार पकड़े गए वाहनों में ट्रैक्टर से 25 हजार के अतिरिक्त प्रति टन 400 रुपए के हिसाब से जुर्माना वसूला जाता है। वहीं ट्रक, टे्रलर व डंपर से एक लाख रुपए के अतिरिक्त 400 रुपए प्रति टन के हिसाब से जुर्माना वसूला जाता है।
पकड़े गए वाहनों पर
वर्ष जब्त वाहन वसूली गई राशि
2017 8 6 48 19110
2018 1003 72123779
2019 708 374596 8 0
स्रोत- खनिज विभाग
Published on:
23 Sept 2019 10:59 am

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