
बनास में बजरी के खनन व परिवहन पर लगी रोक के बाद 10 हजार वाहन पकड़े, 9 करोड़ का जुर्माना भी किया वसूल
टोंक. जिले की बनास नदी में बजरी खनन पर रोक के बावजूद कानूनी पेंच के चलते बजरी का खनन रुक नहीं रहा है। आरोपियों को जिम्मेदार जुर्माने की आड़ में बचा रहे हैं। इससे बजरी खनन माफिया बेखौफ होकर काम को अंजाम दे रहे हैं। कानूनी ढिलाई के कारण बजरी खनन पर रोक नहीं लग पा रही है।
16 नवम्बर 2017 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Order On Sand Mining In Rajasthan) ने बनास नदी Banas river में बजरी खनन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सरकार ने आदेश जारी कर प्रशासन को इस पर रोक लगाने को कहा। प्रशासन ने कई विभागों की टीमें गठित कर इस पर अंकुश लगाने का प्रयास किया, लेकिन ये असरदार साबित नहीं हुआ।
इसका कारण है कि बजरी खनन gravel mining व Gravel transport परिवहन में पकड़े गए वाहनों तथा उनके चालकों के खिलाफ महज एमएमआरडी एक्ट MMRD Act (खनिज विभाग की अनुमति बिना खनन व परिवहन) के तहत ही कार्रवाई की जा रही है। इसमें पकड़े गए वाहन महज जुर्माने के आधार पर छूट जाते हैं। चालक के खिलाफ मामला दर्ज होता है, लेकिन लम्बी प्रक्रिया के चलते वह बेफिक्र हो जाता है।
यह होना चाहिए
सरकार तथा प्रशासन को चाहिए कि वह बनास नदी में बजरी खनन तथा परिवहन करने वालों के खिलाफ सरकारी सम्पति को खुर्दबुर्द करने तथा चोरी की धाराओं में मामला दर्ज करे। चालकों तथा मालिकों के खिलाफ बजरी चोरी व बजरी को सरकारी सम्पति मानते हुए चोरी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए तो धीरे-धीरे बजरी का अवैध खनन रुक सकता है।
एक एक्ट के भरोसे कार्रवाई
बजरी से भरे वाहन पकडऩे के बाद पुलिस उसे खनिज विभाग के सुपुर्द कर देती है। इसके बाद खनिज विभाग तथा पुलिस बजरी से भरे पकड़े गए वाहन के चालक के खिलाफ महज एमएमआरडी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराते हैं। जबकि उन्हें पीडीपीपी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज कराना चाहिए।
ये भी होना चाहिए
- बनास नदी क्षेत्र में आरएसी व सुरक्षा बलों की गश्त।
- कानूनी कार्रवाई हो सख्त।
- ओवरलोड वाहनों पर लगे रोक।
- सडक़ क्षतिग्रस्त करने का भी मामला हो दर्ज।
- संबंधित निकाय भी बरतें सख्ती।
- पुलिस को मिले और अधिकार।
- कर्मचारियों की कमी हो दूर।
ऐसे होता है जुर्माना
खनिज विभाग पकड़ में आने वाले वाहन पर रॉयल्टी से दस गुना जुर्माना वसूलती है। रॉयल्ट शुल्क प्रति टन 40 रुपए है तो 400 रुपए वसूले जाते हैं। इसके अलावा टै्रक्टर-ट्रॉली पर 25 हजार, 16 हजार किलो से कम वाले ट्रक, डम्पर पर 50 हजार तथा इससे अधिक पर एक लाख रुपए का जुर्माना वसूलते हैं।
इनका कहना है.....
खनिज विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं है। उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत करा दिया है। पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर गश्त के दौरान सुरक्षा के लिए आरएएसी की टुकड़ी देने की मांग की है।
- अमीचंद दुहारिया, सहायक अभियंता, खनिज विभाग, टोंक
एक्सपर्ट कमेंट.....गलत कर रहे कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले की बनास नदी में पूर्ण रूप से बजरी खनन पर प्रतिबंध लग जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस की अनदेखी से रोक नहीं लगी है। पुलिस जो कार्रवाई कर रही है उसमें भी एक्ट की अनदेखी कर रहे हैं।
एमएमआरडी एक्ट तथा इसे चोरी में शामिल किया जाए तो कुछ दिनों में ही बजरी का खनन रुक सकता है, लेकिन पुलिस ऐसी नहीं कर रही है। चालकों को केवल शांतिभंग के आरोप में पकड़ रहे हैं।
- चन्द्रप्रकाश श्रीवास्तव, अधिवक्ता व अध्यक्ष जिला अभिभाषक संघ टोंक
फिलहाल किसी को नहीं हुई सजा
बजरी खनन से जुड़े मामले में किसी को भी सजा नहीं हुई है, पुलिस जिन चालकों को पकड़ रही है। उनमें से कुछ को न्यायिक अभिरक्षा तो कुछ को जमानत मिल जाती है।
- राजकिशोर गुर्जर, लोक अभियोजक जिला एवं सैशन न्यायालय टोंक
एसआईटी होगी सक्रिय
बजरी खनन में सभी विभागों का सहयोग नहीं मिल पाता है। पुलिस ने अब तक जिले में सर्वाधिक कार्रवाई की है। जिला कलक्टर से इस मामले में बात भी हुई है। कोर्ट के आदेश के तहत सभी उपखण्डों में पुलिस, परिवहन, खनिज, राजस्व व वन विभाग की एसआईटी को सक्रिय किया जाएगा। ताकि किसी एक पर आरोप-प्रत्यारोप नहीं लगे।
चूनाराम जाट, पुलिस अधीक्षक, टोंक
Published on:
20 Jun 2019 05:04 pm
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