18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जंग-ए-आजादी में बगावत पर छिन गई थी जागीरदारी

तांत्या टोपे को दी थी हवेली में शरणआजादी के लिए टोंक में विद्रोह कर दिया था सैनिकों ने1857 की क्रांति में निभाई भी भूमिकाजलालुद्दीन खानटोंक. देश की आजादी के लिए 1857 में भडक़ी चिंगारी ने टोंक के सैनिकों में भी विद्रोह करा दिया था। तब जंग-ए-आजादी में टोंक की भी अहम भूमिका रही। इसके एक साल पहले 1856 में जब झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के निर्देश पर राजपुताना (राजस्थान) में आए तांत्पा टोपे दो दिन तक टोंक में बड़ा कुआं के समीप टोंक के जागिरदार बख्त बुलंद खां की हवेली में रुके थे।

3 min read
Google source verification

टोंक

image

Jalaluddin Khan

Aug 18, 2022

जंग-ए-आजादी में बगावत पर छिन गई थी जागीरदारी

जंग-ए-आजादी में बगावत पर छिन गई थी जागीरदारी

जंग-ए-आजादी में बगावत पर छिन गई थी जागिरदारी
तांत्या टोपे को दी थी हवेली में शरण
आजादी के लिए टोंक में विद्रोह कर दिया था सैनिकों ने
1857 की क्रांति में निभाई भी भूमिका
जलालुद्दीन खान
टोंक. देश की आजादी के लिए 1857 में भडक़ी चिंगारी ने टोंक के सैनिकों में भी विद्रोह करा दिया था। तब जंग-ए-आजादी में टोंक की भी अहम भूमिका रही। इसके एक साल पहले 1856 में जब झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के निर्देश पर राजपुताना (राजस्थान) में आए तांत्पा टोपे दो दिन तक टोंक में बड़ा कुआं के समीप टोंक के जागिरदार बख्त बुलंद खां की हवेली में रुके थे।

इधर, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 में टोंक नवाबी रियासत से बगावत कर अंग्रेजों के खिलाफ सैनानियों ने आंदोलन किया था। शुरुआत में इनकी संख्या आधा दर्जन से अधिक थी। इसके बाद से लेकर आजादी तक स्वतंत्रता आंदोलन में जुड़े स्वतंत्रता सैनानियों की लम्बी फेहरिश्त है। मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान में मौजूद दस्तावेज के मुताबिक देश की आजादी के लिए टोंक रियासत की सेना के बंदूकची गुल मोहम्मद, सिपाही मुनव्वर खान, सफदरयार खान, निम्बाहेडा तहसील में मुख्य पटेल ताराचंद, मीर आलम खां, अलीम खान ने टोंक रियासत से बगावत की थी।

इसमें मीर आलम खां द्वितीय नवाब मोहम्मद वजीर खां के मामा थे। उन्होंने 1857 में टोंक की विद्रोही सेना का नेतृत्व सम्भाला। दिल्ली के बहादुरशाह की सहायता में इन्होंने 600 सैनिक भेजे। वहीं सितम्बर 1857 में कर्नल जैक्सन की सेना ने जब निम्बाहेडा पर आक्रमण किया तो ताराचंद ने उसे रोकने का प्रयास किया। जब निम्बाहेडा पर अधिकार हो गया तो ताराचंद को गिरफ्तार कर तोप से उड़ा दिया था।


टोंक रियासत के बंदूकची गुल मोहम्मद ने दिल्ली के मुगल सम्राट की सहायता के लिए दिल्ली जा रही सेना का सहयोग किया और अंग्रेजी सेना के विरुद्ध युद्ध किया था। अंग्रेजों के विरुद्ध हुए युद्ध में कई और भी सैनानी शामिल हुए थे। मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान में प्राचीन हस्त लिखित ग्रंथ से लेकर देश की आजादी की विद्रोह, आंदोलन, युद्ध समेत अन्य की किताबें मौजूद है।

ऐसे हुई थी शुरुआत
देश की आजादी के लिए वर्ष 1857 में राजस्थान में सैनिक छावनियों से स्वतंत्रता-संग्राम की शुरुआत हुई थी। उस समय राजस्थान में नसीराबाद, नीमच, ब्यावर, देवली, एरिनपुरा जोधपुर तथा खैरवाड़ा उदयपुर छावनियां थी।


इनकी सहायता से अंग्रेजों ने राजपूताना के लगभग सभी राजाओं को अपने वश में कर रखा था। वहीं टोंक जिले की देवली छावनी अंग्रेजों की तीसरी महत्वपूर्ण छावनी थी। निम्बाहेड़ा से सैनिक देवली पहुंचे और बाद में टोंक आ गए। इस पर टोंक नवाब की सेना भी क्रांतिकारियों के साथ हो गई। इसके बाद यह सेना आगरा की ओर बढ़ गई।


दो दिन रुके थे तांत्या टोपे
नवाब परिवार से जुड़े अब्दुल मुनीम खान ने बताया कि 1857 की क्रांति में तांत्या टोपे की अहम भूमिका थी। वो देशभर में घूमकर देश की स्वतंत्रता के लिए लोगों को अंग्रेजों के सामने एकजुट कर रहे थे। साथ ही सेना बनाकर युद्ध भी कर रहे थे। ऐसे में अंग्रेजों की उनकी पर नजर थी।


इस बीच तांत्या टोपे टोंक आ गए। यहां उन्हें बड़ा कुआं के समीप टोंक के जागिरदार बख्त बुलंद खां ने अपनी हवेली में शरण देकर रोका था। यहां वे दो दिन और दो रात रुके थे। उनके परिवार से जुड़े मोहम्मद सालिक खां ने बताया कि जागिरदार बख्त बुलंद खां ने उन्हें अंग्रेजों से युद्ध करने के लिए चांदी और सोना दिया था।

उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा के बीच किशनगढ़ तक पहुंचाया था। जब इसका पता अंग्रेज सरकार को लगा तो वे नाराज हो गए। ऐसे में टोंक के जागिरदार बख्त बुलंद खां की 12 गांव ही जागीरी छीन ली गई थी। बाद में उसे दूसरे नवाब ने बहाल कर दिया था।


बड़ी खबरें

View All

टोंक

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग