
चारी प्रथा को लेकर कंजर समाज लामबंद, बैठक में प्रदेशभर से पहुंचे पदाधिकारी
टोंक/राजमहल. चारी प्रथा का दंश झेल रही बालिकाओं के मामले में कंजर जाति के लोग लामबंद होने लगे हैं। कुप्रथा के शिक्षा से वंचित बालिकाओं को देह व्यापार जैसे अनैतिक कार्य से बचाने के लिए समाज के पदाधिकारियों के साथ ही पंच पटेल भी आगे आने लगे। अखिल राजस्थान कंजर समाज महापंचायत के तत्वावधान में रविवार को प्रदेशाध्यक्ष ग्यारसीलाल गोगावत की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन चाकसू के चम्पेश्वर महादेव मंदिर के पास सामुदायिक भवन में किया गया।
अध्यक्षता कर रहे प्रदेशाध्यक्ष ग्यारसीलाल ने कहा कि समाज में फैल रही कुरीतियों में अहम कुरीति चारी प्रथा है। जो विवाह में बालिका पक्ष से वर पक्ष की ओर से जाने वाले रुपयों को चारी प्रथा कहा जाता है। इसको बंद करने की अपील की गई है। गौरतलब है कि कंजर जाति विशेष में चारी प्रथा को लेकर बालिकाओं के अनैतिक कार्य में लिप्त होने व बाल विवाह जैसे कुरीति को मिटाने को लेकर राजस्थान पत्रिका ने गत 18 दिसम्बर के अंक में ‘चारी प्रथा के नाम पर बेटियों की हो रही खरीद-फरोख्त, देह व्यापार में झोंक रहे’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
इसके बाद हरकत में आए समाज के पदाधिकारियों ने प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन कर चारी प्रथा को बंद करने का फरमान जारी किया। साथ ही जयपुर जिले के क्षेत्र में नट समाज को फरमान जारी किया गया कि गुवार (नटों) में विवाह के लिए लड़कियों की रिश्तेदारी बंद करने का अखिल राजस्थान कंजर समाज महापंचायत के प्रदेश पदाधिकारियों ने निर्णय किया है।
अगर गुवार (नट) जाति के लोग कंजर समाज में लडक़ी विवाह के लिए ऊंचे दामों पर पैसा देकर रिश्तेदारी करने पर उनके खिलाफ समाज व संगठन के पदाधिकारी सम्बधित विभागीय अधिकारी व पुलिस प्रशासन से कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आदर्श समाज बनाने में योगदान करे, जिससे समाज में कई कुरीतियां दूर हो सकती है।
बालिका शिक्षा पर जोर
लड़कियों को ज्यादा से ज्यादा स्कूल में भेजकर शिक्षा से जोडऩे पर जोर दिया जाएगा। साथ ही फिजूल खर्चे में पंच लोग पंचायत करते हैं। ऐसी पंचायतें बंद करवाने का आह्वान किया गया। समाज सेवी व पुलिस विभाग के एएसआई वीरम देव गुदड़ावत की ओर से समाज को कानून के अधिकार के बारे में बताया।
एडवोकेट प्रकाश चंद्र कर्मावत ने भी बच्चों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा से जोडऩे व कुरीतियां त्यागने पर जोर दिया। समाज का नाम बदलने पर अनुसूचित जाति व विमुक्त घुमंतु -अद्र्धघुमंतु जाति में बरकरार रखते हुए विचार विमर्श कर कंजर की जगह बिजोरिया जाति दर्ज करवाने का प्रस्ताव लिया गया। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष व पदाधिकारियों ने युवा छात्रों को प्रस्शति पत्र सौंपकर सम्मानित किया।
Published on:
27 Dec 2022 07:11 pm
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