
'बोया बीज बबूल का, आम कहां से खाय'.... देशी पेड़-पौधों को खत्म कर रहा विलायती बबूल
पीपलू (रा.क.). 'बोया बीज बबूल का, आम कहां से खाय' संत कबीर के दोहे की यह पंक्ति विलायती बबूल की पूरी कहानी बयां कर देती है। बबूल न सिर्फ देश की जैव विविधिता के लिए बड़ा खतरा है, बल्कि पर्यावरण पर भी बोझ बन गया है। उपखंड क्षेत्र के कुरेड़ा, मोहम्मदनगर उर्फ नयागांव सहित कई स्थानों पर यह बिलायती बबूल आवागमन में परेशानी का सबब बने हुए हैं।
वहीं उपखंड क्षेत्र में फैला विलायती बबूल देशी पेड़-पौधों की कई प्रजातियों को खत्म कर चुका है। इसे समय रहते नहीं मिटाया गया तो देशी पेड़-पौधों की रही-सही प्रजातियां भी खत्म हो जाएगी, शुष्क क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है, वायु प्रदूषण बढ़ जाएगा।
सडक़ तक पसारे पैर
सकड़ के किनारे उगे विलायती बबूलों ने सडक़ों को घेर लिया, जिसके चलते नाथड़ी पंचायत के मोहम्मदनगर उर्फ नया गांव के मार्ग पर दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। अगर समय रहते सडक़ के दोनो किनारे उगे बंबूलों को नहीं कटाया गया तो बडा हादसा हो सकता है। तेज घुमावों पर दोनो तरफ से आने वाले साधन दिखाई नहीं देते।
कई जगह तो सडक़ के दोनों किनारों के बंबूल एक दूसरे से जुड़ गए है। किसी भी वाहन को साइड देने के लिए इन बंबूलों के उगे होने से जगह नहीं रहती है। विशेष परेशानी रात के अंधेरे में इस मार्ग से गुजरने पर होती है। गांव के रामधन चौधरी, कैलाश लाम्बा, राजू निठारवाल, राधेश्याम जावल्या, लक्ष्मीनारायण जाट, श्योजीराम चौधरी ने बताया कि गत दिनों इसकी शिकायत पर जेसीबी इनको काटने के लिए आई थी, लेकिन कार्य अधूरा छोडऩे से परेशानी हो रही हैं।
इस समस्या को लेकर कई ग्राम पंचायत प्रशासन, क्षेत्रीय विधायक को भी अवगत करवाने के बाद भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चारों दिशाओं से गांव में प्रवेश करते समय ऐसा लगता है कि जंगल में प्रवेश कर रहे है। बबूल के पेड़ों के कारण सामने से आ रहे वाहन स्पष्ट दिखाई नहीं देने से कई बार भिंडत हुई।
Published on:
29 Dec 2019 03:39 pm
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