
शेखों की धरती दुबई में गूंजे राजस्थानी भजनों के बोल
टोंक. भक्ति और शक्ति की धरती मरुधरा राजस्थान के परंपरागत भजन बिणजारी , मीठी मीठी बोल बातां थारी रे जासी, ओ मिनख जमानो अनमोल बाता थारी रे जासी..... शेखों की धरती सउदी अरब के दुबई में खूब गूंजे। दुनियाभर में आधुनिकता का पर्याय बन चुके दुबई में राजस्थानी भजनों की गूंज संत प्रकाशदास महाराज व दिनेशगिरी महाराज ने ना केवल वहां के प्रवासी राजस्थानियों व भारतीयों के कानों में भक्ति का मीठा रस घोला बल्कि अरब के शेख भी इसमें शामिल रहे।
राजस्थान गौ सेवा समिति के अध्यक्ष व शेखावाटी में बुधगिरी मठ के महंत दिनेशगिरी महाराज व दादूपंथी भजनों के लिए देशभर में लोकप्रिय निवाई के किंवाड़ा गौ प्रेमी संत प्रकाशदास महाराज उनके शिष्यों के बुलावे पर कुछ दिन पहले दुबई गए थे।
वहां पर अलक्वाज इंडस्ट्रीज में आयोजक व राजस्थान प्रवासी ओमप्रकाश कड़वासरा व चैनप्रकाश जांगिड़ की ओर से भजन संध्या का आयोजन किया गया। भजन संध्या में परम्परागत तरीके से हनुमानजी महाराज का दरबार श्रृंगारित कर अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित की गई और बाद में भजनों की सरिता का प्रवाह शुरू हुआ। इस दौरान ना केवल राजस्थान भारतीय प्रवासी बल्कि मंच पर शेख भी उपस्थित रहे।
उन्होंने दादूपंथी भजनों पर भावविभोर होकर अन्य लोगों के समान महाराज पर पुष्पवर्षा भी की। इस मौके पर संत प्रकाशदास महाराज ने राजस्थानी परंपरा के ओज-शौर्य गीतों की प्रस्तुति भी दी, जिन्हें सुनकर हॉल में मौजूद प्रवासी झूमने लगे।
दुबई में दिखी राजस्थानी संस्कृति की झलक : सउदी अरब के दुबई अलक्वाज इंडस्ट्रीज में आयोजित भजन संध्या के दौरान जहां संत प्रकाशदास महाराज ने दादूपंथी भजनों के अलावा कई राजस्थानी भजन सुनाए। वहीं, हॉल में मौजूद श्रद्धालु भी ज्यादातर राजस्थानी परंपरा के परिधान में सजे-धजे नजर आए। मोर बोलो रे सांवरिया..., रंगरंगीलो प्यारो राजस्थान..., मीठी-मीठी बोल तू तो प्यारी-प्यारी बोल बिणजारी... आदि भजनों पर राजस्थानी साफे में नाचते-झूमते लोग वहां दिखाई दिए।
बदल रहा है लगातार सांस्कृतिक मिजाज
दुनियाभर में आकर्षण के केंद्र दुबई में भारतीय संस्कृति के कई रंग समय-समय पर वहां होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से देखने को मिलते रहते हैं। बीते समय में बॉलीवुड के कलाकारों के विशेष कार्यक्रमों की वहां खूब मांग रहती थी और कई कलाकार साल में कई बार और खासकर दिसम्बर में वहां जाया करते थे। इसके बाद दुबई में हास्य कवि सम्मेलनों का दौर भी खूब चला और अब इसमें राजस्थानी संस्कृति के कार्यक्रमों ने भी अपनी जगह बनाना शुरू किया है।
Published on:
22 Dec 2022 06:35 pm
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