
मालपुरा को जिला बनने का हक, नहीं तो टोंक जिले में ही रखा जाए: व्यास
टोंक. मालपुरा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र व्यास ने जिला पुनर्गठन समिति के अध्यक्ष राम लुभाया को पत्र सौंपकर मालपुरा तहसील के विषय में तथ्यात्मक टिप्पणी दी है। इसमें कहा कि 21 मार्च 2022 को भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे रामलुभाया की अध्यक्षता में जिला पुनर्गठन समिति का गठन किया गया। इसमें जनप्रतिनिधियों अथवा सामान्य जन से प्राप्त अनुरोध या आग्रह के सम्बंध में परिक्षण कर 6 महीने में राज्य सरकार को अपनी सिफारिश प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।
इसके बाद मालपुरा तहसील की ओर से किसी की भी ओर से अध्यक्ष रामलुभाया या मुख्यमंत्री समेत अधिकृत व्यक्ति के समक्ष कोई आग्रह या प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के गठन के समय 26 जिलों का गठन किया था। इन जिलों का गठन जनसंख्या, भागौलिक, सीमाएं व मुख्यतया विभिन्न स्वतंत्र रियासतों का विलीनीकरण कर स्वतंत्र राजस्थान बनाया था। उन्होंने धौलपुर और भरतपुर का हवाला दिया कि बड़े क्षेत्रफल के चलते धौलपुर को जिला बनाना आवश्यक था। इसके बाद कई जिलों का गठन किया गया।
जयपुर रियासत के समय मालपुरा तहसील एक डिप्टी कमिश्नर का मुख्यालय था। इसका क्षेत्राधिकार खेतड़ी तक फैला हुआ था। राजस्थान के निर्माण से पहले भी मालपुरा जिला रह चुका था। टोंक रियासत छोटी थी। इसका विलीनीकरण राजस्थान में हुआ तो टोंक के नवाब से इस प्रकार की सहमति बनी कि उसे कम से कम जिला मुख्यालय रखा जाए।
इसके बाद तत्कालीन सरकार ने मालपुरा जैसे तहसील सब-डिवीजन (डिप्टी कमिश्नर जिला) जो भौगोलिक रूप से टोंक रियासत से जुड़ा हुआ था, उसे टोंक जिले में शामिल कर दिया गया। तब मालपुरा के लोगों ने भी प्रदेश हित में इस विलीनीकरण को सफल बनाने के अनुरूप कोई प्रतिरोध नहीं किया। इसका कारण था कि किसी भी स्थिति में टोंक जिले का विभाजन ²ष्टिगत नहीं होता था।
इस प्रकार मालपुरा की ओर से कोई भी ज्ञापन, प्रार्थना पत्र, सुझाव, अनुरोध या मांग जिला बनाने के लिए प्रस्तुत करने का कोई कारण नहीं बनता था। उन्होंने कहा कि गत 17 मार्च 2023 को मुख्यमंत्री ने नए जिलों के सृजन सम्बंध में विधानसभा में घोषणा की थी। जो राजनीतिक रेवड़ी बांटने का अनुठा प्रयोग था। मुख्यमंत्री को इस प्रकार 19 जिलों की घोषणा नहीं करनी चाहिए थी। इसमें यह कहना कि कई छोटे प्रांतों में भी 50 जिले हैं। इसमें कोई उचित कारण नहीं हो सकता कि राजस्थान में आवश्यक रूप से 50 जिले हों।
अगले चुनावों फिर से आएगी सरकार
उन्होंने कांग्रेसी होने के नाते कहा कि इस सरकार ने बहुत जनहित के कार्य किए हैं। अगले चुनावों में यह सरकार वापस आएगी। तब विस्तार से कमेटी बैठाकर 50 जिलों का आनुपातिक निर्माण कर सकेंगे। बिना किसी न्यायोचित आधार के मुख्यमंत्री को 19 जिलों की घोषणा करने का अधिकार तो बनता है। लेकिन यह वैधानिक रूप से उपयुक्त नहीं कहा जा सकता है।
12 जनवरी 2023 से पहले कोई ज्ञापन अथवा अनुशंसा समिति के समक्ष अलग जिला बनाने की प्रस्तुत नहीं की गई है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा ने मांगों और आंदोलनों का पिटारा खोल दिया है। इससे मालपुरा भी अछूता नहीं है। मालपुरा कभी रियासत के जमाने में डिप्टी कमिश्नर का कार्यालय था एवं पूर्व में जिला रह चुका है। जन भावानाओं को आंदोलित होना अपेक्षित एवं उचित है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की 17 मार्च 2023 को 19 जिलों की घोषणा के बाद जिला पुनर्गठन समिति में नए जिले सृजित करने के लिए सिफारिश करने की कोई शक्तियां अवशेष नहीं रही है। मात्र इनकी घोषणा के अनुरूप विभिन्न प्रस्तावित जिलों का भौगोलिक सीमांकन कर सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। ऐसा होता है तो यह प्रदेश के हित में नहीं है। अनुचित, अनधिकृत और अवैधानिक है। उन्होंने आग्रह किया कि मालपुरा को कम से कम टोंक जिले में ही रहने दिया जाए। जबकि मालपुरा का वास्तविक हक नया जिला बनने का है।
Published on:
06 May 2023 02:54 pm
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