
डेयरी व्यवसाय से युवाओं का रुक सकता है पलायन, गांव में ही मिल सकता है रोजगार
निवाई. डेयरी उद्योग ग्रामीणों युवाओं के रोजगार का माध्यम बन सकता है। राजस्थान आजीविका मिशन के तहत डेयरी प्रबंधन पर ग्रामीण युवाओं को गांव में ही डेयरी व्यवसाय विकसित करने के लिए रोजगार दक्षता आधारित प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें पशुपालकों को पशुपोषण, पशु प्रजनन, पशु स्वास्थ्य, पशु प्रबंध, स्वच्छ दूध उत्पादन, दूध के विभिन्न उत्पाद, प्रोजेक्ट रिपोर्ट एवं मार्केङ्क्षटग में दक्षता विकसित की गई। जिससे जिले में सैकड़ों युवा डेयरी को व्यवसाय के रूप में अपनाकर रोजगार प्राप्त कर रहे है।
कैसे हो स्थापित डेयरी व्यवसाय:
दूध एवं दूध उत्पादों की मांग में तेजी से बढ़ोत्तरी एवं प्रतिस्पर्धा के कारण आज गांव में विभिन्न सहकारी, प्राईवेट डेयरियों एवं दूधियों द्वारा 40-50 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध की खरीद की जा रही है। व्यवसाय में पांच मुर्राह नस्ल की भैसें या गायों से प्रतिवर्ष दो लाख रुपए का लाभ कमाया जा सकता है। संकर गाय व भैस डेयरी के आय-व्यय की गणना करे तो एक वर्ष में 3 लाख रुपए की आय जिसमें 10 हजार लीटर दूध से 5 लाख एवं खाद एवं बछडों की बिक्री से 50 हजार रुपए होगी।
पशुधन विकास में केन्द्र के प्रयास
कृषि विज्ञान केन्द्र वनस्थली की ओर से पशुपालकों में दक्षता विकसित करने के लिए प्रतिवर्ष सैकड़ों पशुपालकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। कृषि विज्ञान केन्द्र पशुपालन संबंधी वैज्ञानिक तकनीकी का प्रचार-प्रसार एवं मॉडल डेयरी फार्म की स्थापना में तकनीकी मार्गदर्शन कर रहा है।
पुशपालक को रहा आर्थिक लाभ
नेपीयर हाईब्रिड बाजरे के चारा पशुओं को खिलाने से दूध में बढ़ोतरी तो होती है साथ ही पशुओं को भूसा खिलाने की आवश्यकता नहीं रहती। भूसा मंहगे दामों पर मिलता है और नेपीयर हाईब्रिड चारा बारह महीने मिलता है। जिससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ मिलता है।
डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए उन्नत नस्ल के पशुओं का होना आवश्यक है और इसी के तहत जिले के 500 गांवों में राष्ट्रीय नि:शुल्क कृत्रित गर्भाधान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसमें कृत्रित गर्भाधान से पशुओं की उन्नत नस्ल पैदा होगी।
डॉ.ए.के.पांडे, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग टोंक
&ग्रामीण युवाओं में दक्षता विकसित कर उन्हें उद्यमी बनाया जा सकता है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्धारा गांव सम्पूर्ण जिले के सैकड़ों गांवों में नेपीयर हाईब्रिड बाजरा खेतों में स्थापित किया गया है जो पांच तक चलेगा। जिससे पुशपालकों को अलग से हरा चारा खरीदना नहीं पड़ेगा।
डॉ.धर्मवीर ङ्क्षसह, वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र वनस्थली विद्यापीठ
Published on:
30 Jan 2023 07:55 pm
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