
मां तो मां होती है, खुद गीले में सोती हैं
मां तो मां होती है, खुद गीले में सोती हैं, बेटों को सुखे में सुलाती है
परमात्मा को हम देख नहीं पाते है, पर मां को तो सदैव अपने करीब ही पाते हैं
मां की गोद से बड़ा कोई स्वर्ग क्या होगा, मां से बड़ा भी पवित्र रिश्ता भी क्या होगा।
अगर मां नहीं हो तो घर-घर नही सराय होगा, मां अगर आगे बढ़ेगी तो घर भी आगे बढेंगा।।
मां सबसे बड़ा पूजा घर होती है, मां अपने बच्चों की अध्यापक होती है।
मां के ममत्व की कोई भाषा नही होती, मां की वस्तुत: कोई परिभाषा नहीं होती है।।
मां सबसे पहले उठती और सबके बाद सोती है,
मां अपने लाड़ले बेटे के इंतजार में घण्टों रोती हैं।
मां का कर्ज कोई नहीं चुका सकता हैं,
मां क्या होती है, एक बच्चा बता सकता हैं ।
मां के लिए बच्चा लैपटॉप होता हैं,
मां भी बच्चों के लिए सॉफ्टवेयर होती है।
मां त्याग हैं, तपस्या है, सेवा हैं,
मां से बड़ा देवालय क्या होगा,
मां से बड़ा कोई हिमालय क्या होगा।
मां एक सीपी है जो अपनी सन्तान के लाखों रहस्य छिपा लेती हैं
मां एक चमक है जिसमें, स्नेेह का रंग उजागर होता हैं
मां की गोद दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय होता है,
जिस पर मां का आशीर्वाद होता है, वह दुनिया का सबसे धनी व्यक्ति होता है।
मां जैसे छोटे से शब्द में पूरी दुनिया समाई हुई है,
इस दुनिया में केवल मां की सुगन्ध ही छाई हुई है।
व्यक्ति वैसा ही बनता है, जैसा मां बनाना चाहती है,
मां के पेट में बच्चा वही खाता हैं,जो मां खाती हैं।
लबों पर जिसके कभी, बददुआ नही होती,
एक मां ही है जो कभी, हमसे खफा नही होती।
मां तो मां होती है, बेटा चाहे नालायक हो,
मां सभ्यता , संस्कारों की जननी होती है।
उसके संस्कारों से बेटा,
नालायक से लायक बनता है।
कवि - पंकज चन्देल, टोंक राजस्थान
Published on:
06 Aug 2021 05:32 pm
