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जन-जन की भक्ति व आस्था की प्रतीक है मां जलदेवी

बावड़ी गांव मां जलदेवी माता मंदिर जन-जन की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है। बावड़ी स्थित मां जलदेवी माता आज जन-जन की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र बन गया।

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जन-जन की भक्ति व आस्था की प्रतीक है मां जलदेवी

जन-जन की भक्ति व आस्था की प्रतीक है मां जलदेवी

टोडारायसिंह . टोडारायसिंह से 14 किमी. दूर झिराना मार्ग स्थित बावड़ी गांव मां जलदेवी माता मंदिर जन-जन की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है। बावड़ी स्थित मां जलदेवी माता आज जन-जन की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र बन गया।


सन 1960-62 में जनसंघ से टोंक विधायक रहे चुके ठा. उदयङ्क्षसह के पुत्र कु. अजीतङ्क्षसह ने मंदिर का निर्माण कराया। तब से नवरात्रो में चैत्र पूर्णिमां पर माताजी का मेला भरता है। यहां मन्नत पूरी होने पर लोग जागरण व सवामणी करते है।

मंदिर विकास समिति अध्यक्ष व पूर्व डीआर अजयङ्क्षसह ने बताया कि वर्तमान में गठित मां जलेदवी माताजी विकास समिति के तहत मंदिर विकास के साथ मंदिर धर्मशाला का बड़े स्तर पर निर्माण चल रहा है।

यात्रियों की सेवार्थ चैत्र व शारदीय नवरात्रों में विशेष भण्डारे का आयोजन होता है। वर्ष में दो बार चैत्र व शारदीय नवरात्रों में माता जलदेवी के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ लगती है, इस बीच 9 दिन तक मेला भरता है। स्थिति यह है कि बस स्टेण्ड से पन्द्राहेड़ा रोड व माताजी मंदिर तक करीब डेढ़ से दो किमी. क्षेत्रफल में हाट (दुकाने) लगता है।

मां दुर्गा की आराधना के पर्व नवरात्र शुरू

टोंक. कोरोना महामारी को लेकर सरकार की ओर से गाइड लाइन के अनुसार लगाई गई सभी प्रकार की पाबंदियों को वापस लेने के बाद शनिवार से शुरू हुए चेत्र नवरात्र पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था का उमड़ पड़ी। जिले भर में चैत्र नवरात्र पर घट स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की आराधना के पर्व नवरात्र शुरू हुए। मंदिरों व घरों में श्रद्धालुओं ने शुभ मूर्हत में घट स्थापना की।

शहर के कंकाली माता मंदिर में सुबह की आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु सुबह छ बजे ही पहुंच गए। नवरात्र का पहला दिन होने के कारण मंदिरों में माता के दर्शनों क लिए सुबह से श्रद्धालुओं का आना जाना रहा। वही गर्मी के मौसम को देखते हुए मंदिर समिति संचालकों के ओर से शीतल जल व छाया का भी प्रबंध किया गया है।

शहर के कंंकाली माता, बनास नदी स्थित वैष्णो देवी माता, काफला स्थित नला वाली माता, हाइवे स्थित स्वर्ण दूर्गा माता व पुरानी टोंक गढ़ स्थित बराई माता मंदिर में दुर्गा मां की विशेष झांकी सजाई गई।

इसी तरह रीको स्थित श्रीआतरियां के बालाजी, दूधिया बालाजी , बड़ के बालाजी, डिपों के बालाजी, नसिंया के बालाजी, अन्नपूर्णा बालाजी मंदिरों व भेंरू जी के स्थानों पर कई धार्मिक आयोजन शुरू है।