टोंक. देवली को जिला बनाने की मांग को लेकर मंगलवार को देवली जिला बनाओ संघर्ष समिति के संयोजक नेमीचंद जैन की अगुवाई में एक शिष्ठ प्रतिनिधि मंडल व व्यापार संघ ने अपनी मांग के समर्थन में मंगलवार को कलक्ट्रेट में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होने जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में लिखा है कि देवली नगर पालिका क्षेत्र विरासत, शहादत के साथ ही आजादी के आंदोलनों में यहां के रणबांकुरों की और से दी गई प्राणों की आहुति के लिए जाना जाता है। उन्होंने बताया कि देवली तीन जिलों अजमेर, भीलवाड़ा व बूंदी की सीमा के बीच बसा हुआ है तथा राज्य की बहुद्देशीय बीसलपुर बांध परियोजना से सम्पूर्ण राज्य में अपनी पहचान बनाए हुए है। आजादी में शहादातों को देखते हुए तथा पराधीनता के समय अंग्रेजी शासन की और से दिए गए छावनी नाम से इसे मुख्य केंद्र मानते हुए आजादी के पश्चात यहां सीआरपीएफ सेना का मुख्यालय बना जहां आज सीआईएसएफ गतिशील है।
ज्ञापन में लिखा है कि 39 ग्राम पंचायतों से पंचायत समिति एवं 25 वार्डो को मिला करके शहर में नगर पालिका का गठन हुआ जो सम्पूर्ण तहसील ग्रामीण एरिया व नगर पालिका एरिया में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री का हाल ही विधानसभा में पूरक बजट में राज्य की जनता को 19 नए जिलों व तीन नए सम्भाग की दी गई सौगात की तरफ ध्यान दिलाया गया है। जिसमे लिखा है कि देवली को जिला नही बना करके यहां की जनता के हितों से कुठाराघात किया गया है।
समिति ने सीएम के नाम दिए ज्ञापन में मांग की है कि देवली को जिला बनाया जाए यदि नही तो इस कस्बे को इसकी पंचायतों की सीमाओं को अन्य नवसृजित जिलों में शामिल किया जाता है तो जनांदोलन को मजबूर होना पड़ेगा। जिसके तहत ज्ञापन चक्काजाम, भूख हड़ताल, घेराव, आमरण अनशन व बन्द आदि कदम उठाना पड़ेगा।
प्रतिनिधि मंडल में भाजयुमो अध्यक्ष मनोज शर्मा, किशन गोपाल शर्मा, भीमराज जैन, सौरभ जिंदल, नोरतमल नामा, राजीव भारद्वाज, प्रितपाल सिंह, सीताराम साहू, रामेश्वर सैनी, सुरेन्द्र, अकील कुरेशी, राकेश कुमार, महावीर सिंह आदि शामिल थे।