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कोटा के भरोसे टोंक की तैयारी, बचाव के नाम पर सिर्फ खाली कट्टे, अतिक्रमण की चपेट में है नालें व बरसाती पानी निकासी के रस्ते

प्रशासन आपदा प्रबंधन की बैठक में महज बांध व तालाब की पाळ को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी से भरे कट्टे तथा गेती-फावड़े तक ही सीमित है।

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प्रशासन आपदा प्रबंधन की बैठक में महज बांध व तालाब की पाळ को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी से भरे कट्टे तथा गेती-फावड़े तक ही सीमित है।

टोंक. मौसम विभाग के अनुसार इस साल जिले में मानसून मेहरबान रहेगा, लेकिन इस दौरान आने वाली सम्भावित आफत से निपटने के लिए प्रशासन सतर्क नहीं है। बस तैयारी के नाम पर बांधों तथा तालाबों में होने वाले सुराख व पाळ टूटने को लेकर मिट्टी से भरे कट्टे रखे गए हैं।

रेस्क्यू भी कोटा के भरोसे है। जबकि आपदा प्रबंधन के नाम पर अधिकारी बैठकें कर महज पानी निकास तथा कट्टों की तैयारी कर रहे हैं। हैरानी वाली बात ये है कि प्रशासन के पास इलेक्ट्रॉनिक तथा इंजन वाली नाव तक नहीं है। ना ही ट्यूब नाव है।

रेस्क्यू के लिए भी स्थानीय गोताखोर तथा आरएसी के जवानों की मदद लेनी पड़ती है। बड़ी आपदा आने पर रेस्क्यू दल कोटा से बुलाना पड़ता है। जबकि जिले में हर साल डूबने तथा पानी से घिरे लोगों को बचाना पड़ता है। इसके बावजूद प्रशासन आपदा प्रबंधन की बैठक में महज बांध व तालाब की पाळ को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी से भरे कट्टे तथा गेती-फावड़े तक ही सीमित है।

अतिक्रमण की चपेट में है नहर

आधे शहर के बरसात के पानी का निकास करने वाली हाउसिंग बोर्ड के समीप की नहर पर लोगों ने अतिक्रमण कर पक्के निर्माण कर लिए हैं। ऐसे में हर साल हाउसिंग बोर्ड के पानी का निकास नहीं होता और बाढ़ के हालात हो जाते हैं।

इस बार भी अधिकारी नहर को लेकर अनजान बने हुए हैं। दो साल पहले 40 लाख रुपए की लागत से जल संसाधन विभाग ने बाढ़ राहत आपदा मद से इस नहर की मरम्मत कराई थी।

करीब 4 किलोमीटर लम्बी नहर मोतीबाग तालाब से निकल कर, मोतीबाग, धन्नातलाई, पशु पालन विभाग, कृषि मण्डी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सरपंच कॉलोनी होते हुए बमोर रोड पर जा रही है। दो साल पहले तीन टुकड़ों में इसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया।

इसके चलते गत साल भी पानी का निकास नहीं हो पाया। इस बार भी समय पर इसकी मरम्मत तथा अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो सबसे ज्यादा हाउसिंग बोर्ड प्रभावित होगा।

पानी से घिर गए थे मकान
गत 11 अगस्त 2017 को चार घंटे झमाझम हुई बरसात ने शहर के हालात बिगाड़ दिए थे। इन चार घंटों में 150 एमएम (6 इंच) बरसात दर्ज की गई। इससे कई कच्चे मकान ढह गए। दुकानों व मकानों में पानी भर गया।

सडक़ें लबालब हो गई। मजबूरन पुलिस को यातायात रोकना पड़ा। लोगों की शिकायत के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. रेखा गुप्ता ने शहर की कई बस्तियों का दौरा किया।

ये पानी रजबन, कालीपलटन, पुरानी टोंक, अन्नपूर्णा कॉलोनी, बहीर, तालकटोरा, गड्ढा पहाडिय़ा समेत अन्य कॉलोनियों में पानी भर गया। वहीं सुभाष बाजार, पांचबत्ती, काफला व नौशेमियां का पुल क्षेत्र में सडक़ें लबालब हो गई। कोतवाली थाना पुलिस ने इस मार्ग से वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया।