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पीपलू के माशी बांध में नहीं हुई पानी की आवक, गत वर्ष भी 7 साल बाद भरा था बांध

पीपलू के माशी बांध में नहीं हुई पानी की आवक, गत वर्ष भी 7 साल बाद भरा था बांध  

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पीपलू के माशी बांध में नहीं हुई पानी की आवक, गत वर्ष भी 7 साल बाद भरा था बांध

पीपलू के माशी बांध में नहीं हुई पानी की आवक, गत वर्ष भी 7 साल बाद भरा था बांध

पीपलू (रा.क.). उपखंड क्षेत्र की समृद्धि खुशहाली के प्रतीक माशी बांध में सितंबर के प्रथम सप्ताह के अंत तक भी पानी की आवक नहीं होने से किसान खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। जहां वर्ष 2019 में करीब 7 साल बाद माशी बांध के कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश होने से 20 अगस्त 2019 को ही 10 फीट भराव क्षमता को छूने के बाद चादर चली थी, लेकिन इस बार अभी तक डेढ़ स्टोरेज भी कवर नहीं हो पाया हैं।

सिंचाई विभाग की जेईएन शिवांगी गोयल ने बताया कि मासी बांध में 6 सितंबर 2020 तक 448 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं गत वर्ष 6 सितंबर 2019 तक 726 एमएम बारिश हो चुकी थी। वहीं गत वर्ष कुल 8 29 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। जबकि सामान्य बारिश 600 मिमी होती है। इस बार के मानसून में बांध में पानी की आवक न के बराबर हुई हैं। फिलहाल डेड स्टोरेज में गत वर्ष का पानी बचा हुआ हैं।

गत वर्ष 7 सालों बाद भरा था माशी बांध
पीपलू उपखंड क्षेत्र के लोगों की लाइफलाइन माशी बांध में 2011 के बाद 2019 में फुल भराव क्षमता 10 फीट पहुंचने के बाद 20 सितंबर को चादर चली। सिंचाई विभाग के जेईएन शिवांगी गोयल ने बताया कि बांडी, खेराखाशी व माशी नदी से बांध में पानी की आवक होती हैं। इस बांध के भरने से 29 गांवों के करीब 30 हजार से अधिक लोगों को लोगों को फायदा मिलता हैं। बांध के भरने पर किसानों को सिंचाई के लिए नहर से पानी मिलता हैं लेकिन इस बांध के अभी तक रीता होने से किसान खासे चिंतित नजर आ रहे हैं।

चार बार ही हुआ लबालब
माशी बांध डेढ़ दशक में केवल चार बार ही लबालब हुआ है, वहीं दो बार चादर चली है। इसका मुख्य कारण जलभराव करने वाली नदियों के रास्ते में रोककर बनाए हुए दर्जनों एनिकट है, जिससे बांध भराव क्षमता के आंकड़े को प्रतिवर्ष छूने में विफल रहने लगा है।

बांध की नहरों पर निर्भर किसान

माशी बांध से पीपलू क्षेत्र में गहलोद तक 40 किलोमीटर लम्बी मुख्य नहर व दर्जनों वितरिकाएं बनी हुई है। ऐसे में नदी तल से 16 फीट ऊंचाई पर बने शून्य बिन्दू से 10 फीट भराव क्षमता वाले माशी बांध के भरने से इन नहरों में पानी छोड़ा जाता है, तो क्षेत्र में 6 98 5 हैक्टेयर जमीन पर रबी की फसल में सिंचाई की जाती है, जिससे क्षेत्र का किसान समृद्ध व खुशहाल होता है। लेकिन गत डेढ दशक में बांध चार बार ही पूरा भरा है।