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क्षतिग्रस्त सडक़ पर प्रशासन नहीं गंभीर, आए दिन वाहन हो रहे है दुर्घटनाग्रस्त

जिले के ग्रामीण क्षेत्र में सडक़ों के हाल बेहाल है। शहर में तो फिर भी सुनवाई हो जाती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अधिकारी लापरवाही बरतते हैं। इससे ग्रामीणों को सडक़ की सुविधा नहीं मिल पाती है।  

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क्षतिग्रस्त  सडक़ पर प्रशासन नहीं गंभीर, आए दिन वाहन हो रहे है दुर्घटनाग्रस्त

क्षतिग्रस्त सडक़ पर प्रशासन नहीं गंभीर, आए दिन वाहन हो रहे है दुर्घटनाग्रस्त

देवली. उपखंड मुख्यालय से देवली गांव पंचायत एवं नेकचाल बालाजी को जोडऩे वाली सडक़ कई वर्षों से गड्ढों एवं बारिश में कीचडय़ुक्त से दुर्घटना स्थल बन गई है। मात्र 200 मीटर लंबे सडक़ मार्ग के समाधान को लेकर प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं होने से क्षेत्र की 50 हजार जनता परेशान है। इस मार्ग का तहसील राजस्व टीम सीमाज्ञान नहीं कर सकी है। भू प्रबंध विभाग की टीम भी तहसील कार्यालय से पत्र के डेढ़ महीने बीतने के बाद भी सीमा ज्ञान करने नहीं आई। इससे क्षेत्र की जनता में आक्रोश पनप रहा है।

देवली गांव पंचायत के लोगों की सबसे बड़ी समस्या यह मार्ग है। नेकचाल मार्ग ही उपखंड मुख्यालय आने का रास्ता है।रोजाना हजारों लोग प्रशासनिक, व्यापारिक एवं अन्य कार्य से इस मार्ग से आवागमन करते हैं। विडंबना यह की राजस्व ग्राम देवली में ग्राम पंचायत एवं नगरपालिका दोनों स्थापित है। पंचायत की सीमाएं उपखंड मुख्यालय से जुड़ी है।

इसकी समस्त सिवायचक भूमि करीब 9 वर्ष पूर्व नगर पालिका देवली के नाम दर्ज की जा चुकी है। सीआईएसएफ से विवाद और ग्रामीण आंदोलन बाद समानांतर नई सडक़ बनाई गई।जहां से नेकचाल बालाजी जाने वाले श्रद्धालुओं समेत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के करीब 50 हजार लोग सडक़ की दुर्दशा से परेशान है। लेकिन समाधान नहीं होने से बीच में 200 मीटर सडक़ नामोनिशान मिटकर गड्ढ़ों में तब्दील होकर दुर्घटना स्थल बन गई है।

अंबेडकर भवन ने रोकी राह:

नेकचाल सडक़ मार्ग पर जब से नगर पालिका ने 50 लाख लागत का अंबेडकर भवन निर्माण करवाना शुरू किया। इसके बाद से वहां पर करीब 200 मीटर लंबे सडक़ मार्ग ने आमजन की राह मुश्किल कर दी। अंबेडकर भवन निर्माण जगह की भूमि है। जिसको पालिका अपनी खातेदारी भूमि बताती है और काबिज खातेदार अपनी। इसमें कार्य नहीं होने से ग्रामीणों का मुख्य आवागमन का रास्ता जरूर अवरूद्व हो गया।

ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई:
मार्ग की समस्या लगातार बनी हुई है। रविवार को भी इस मार्ग पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। इसमें चालक समेत अन्य को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं मार्ग भी अवरुद्ध रहा।

टीम बिना सीमाज्ञान लौटी

देवली गांव के ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को उपखंड मुख्यालय को जोडऩे वाली नेकचाल सडक़ के समाधान की मांग उठाई। जिस पर तहसील स्तर से 5 सदस्यीय टीम बनाई गई। इसमें दो भू अभिलेख निरीक्षक व तीन पटवारी शामिल थे। जो ग्राम देवलीगांव के ख. न. 4106 गे. मु पाल सिवायचक का सीमा ज्ञान करने 4 अगस्त को पहुंची। लेकिन बिना नाप किए टोंक से भू प्रबंध विभाग की टीम को बुलाने की रिपोर्ट आकर सौंप दी। जिसके बाद तहसील कार्यालय से भी 16 अगस्त को भू प्रबंध विभाग टोंक को पत्र भेजकर सीमाज्ञान के लिए पत्र लिखा गया। लेकिन डेढ़ माह बीतने के बाद भी कोई टीम विवाद समाप्त करने और सीमाज्ञान के लिए नहीं आई है। जिससे लोगों में आक्रोश पनप रहा है।

&नेकचाल सडक़ के सीमाज्ञान के लिए ग्रामीणों की मांग पर राजस्व टीम भेजी थी। जिसने सेटलमेंट विभाग से नाप चोप के लिए रिपोर्ट दी थी। बाद में भू प्रबंध विभाग टोंक को 16 अगस्त को पत्र लिख चुके है।
- रामकल्याण मीना, तहसीलदार देवली


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