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खाली कर दो बांध पेटा

"आग लगने पर कुआं खोदने" वाली स्थिति हर साल बीसलपुर बांध परियोजना की हो रही है। परियोजना

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Mukesh Kumar Sharma

Jul 28, 2015

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टोंक,राजमहल।"आग लगने पर कुआं खोदने" वाली स्थिति
हर साल बीसलपुर बांध परियोजना की हो रही है। परियोजना अभियंता साल भर तो बांध पेट
पर ध्यान देते नहीं। जब बांध में पानी की आवक तेजी से बढ़ने लगती है तो उन्हें बांध
पेेटे में खेती करने वाले किसानों की याद आती है। जबकि परियोजना के अभियंताओं को
सालभर इसकी जानकारी रहती है, लेकिन लापरवाही के चलते वे किसानों को बांध पेटे से
दूर नहीं करते।


एक बार फिर बीसलपुर बांध में लगातार हो रही पानी की आवक
के चलते परियोजना अभियंताओं ने मंगलवार को जलभराव के समीप खेती करने वाले किसानों
को यहां से जाने की चेतावनी जारी की है।

मंगलवार शाम 6 बजे बीसलपुर बांध का
गेज 313.58 आरएल मीटर पहुंच गया। इसके साथ पानी का फैलाव होने लगा है।
इसके
चलते परियोजना ने चेतावनी जारी कर जलभराव के समीप व बांध के टापू पर खेती करने वाले
किसानों अन्य स्थानों पर जाने को कहा है।

बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता
आर. सी. कटारा ने बताया कि बांध में अचानक पानी की आवक बढ़ने पर किसी प्रकार की
दुर्घटना या हादसे की आशंका नहीं हो इसके लिए चेतावनी जारी की गई है।

इधर,
जलभराव क्षेत्र समेत किनारों पर खेती करने वाले लोग सामान समेटकर अन्यत्र व
विस्थापित कॉलोनियों की ओर जाने की तैयारी में जुट गए हैं।


रोक
बेअसर


बीसलपुर परियोजना ने डूब क्षेत्र में आए गांवों के पुनर्वास पर
भले ही अरबों रूपए खर्च कर दिए हों, लेकिन डूब क्षेत्र की जमीन से ग्रामीणों का मोह
छूट नहीं रहा। हर साल बांध में आने वाले पानी के साथ अभियंताओं को बांध पेटे में
खेती करने वाले किसानों को खदेड़ना पड़ता है।


एक बार फिर बांध का गेज
बढ़ने पर पेटा खाली करने की चेतावनी जारी करनी पड़ी है। गौरतलब है कि बीसलपुर बांध
की करीब दो सौ हैक्टेयर भूमि पर एक दर्जन से अधिक गांवों के किसान काश्त करते हैं।
इनमें बाडा, नासिरदा, डाबर, नेगडिया, थड़ोली, सुजानपुरा, ठगारिया, भंवरथला, सांडला,
सरसड़ी आदि गांवों के किसान शामिल हैं। ये बांध का जलभराव कम होने के साथ ही बांध
किनारे व जलभराव में खाली होने वाले भूमि पर अस्थायी झोंपड़ी बनाकर रहने लग जाते
हैं। बांध में पानी की आवक बढ़ने के साथ ही वे सामान समेटकर चले जाते हैं।


यह है आदेश

प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 26 अगस्त 2010 को
उच्चस्तरीय पेयजल समीक्षा बैठक में पेटा काश्त प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद जलदाय विभाग (मुख्यालय) जयपुर के मुख्य अभियंता ने 8 अक्टूबर 2010 को टोंक
जिला कलक्टर को आदेश जारी कर बीसलपुर बांध में पेटा काश्त को प्रतिबंधित किया था।
इसके बावजूद जिला प्रशासन ने पेटा काश्त पर रोक नहीं लगाई है।

सावधानी
जरूरी है
बीसलपुर बांध में पानी कम होने पर किसान खेती करते हैं। अभी तो पानी
भरा हुआ है। ऎसे में खेती नहीं हो रही है। फिर भी सावधानी के तौर पर चेतावनी जारी
की गई है कि नदी पेटे मे लोग नहीं जाए।
आर. सी. कटारा, अधिशासी अभियंता,
बीसलपुर परियोजना देवली