
अनदेखी: सरकारी जमीन पर बनाया प्रधानमंत्री आवास योजना का मकान, किस्त भी कर दी जारी
नगरफोर्ट. योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद को मिले, लेकिन योजना के नाम पर इतनी भी लापरवाही नहीं हो कि उसका दुरुपयोग ही हो जाए। ऐसा ही मामला नगरफोर्ट तहसील की ग्राम पंचायत बोसरिया के हुकूमपुरा गांव में सामने आया है। जहां अधिकारी-कर्मचारियों की गम्भीर लापरवाही सामने आई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि दबंग लोगों ने सरकारी जमीनों को कब्जाने में प्रधानमंत्री आवास योजना का सहारा ले लिया है। सरकारी जमीन पर अनुदान लेकर मकान बनवा रहे हैं और जमीन की फर्जी रिपोर्ट लगा रहे हैं। दस्तावेज के मुताबिक हु$कूमपुरा निवासी श्योजी लाल पुत्र खानाराम माली ने जमीन की फर्जी रिपोर्ट बनाकर सरकारी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान बनाकर भुगतान उठा लिया।
सरकारी जमीन पर किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर आवास बनवा दिया। सरकारी जमीन को लाभार्थी की जमीन बताकर ग्राम पंचायत ने लाभार्थी को मकान बनाने की किस्तें भी जारी कर दी और अब वह निर्माण पूरा भी हो गया।
उपखण्ड अधिकारी ने कराई थी जांच: ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि सरकार की सिवायचक भूमि है, जिसके खसरा नंबर 347 / 154 को जिला कलक्टर को स्कूल खेल मैदान के लिए आवंटित करने के लिए ज्ञापन भी सौंपा गया था। जिला कलक्टर ने कार्रवाई के लिए उपखंड अधिकारी उनियारा को निर्देशित किया था।
उसके बाद उनियारा तहसीलदार ने मौका निरीक्षण के दौरान उक्त भूमि का मौका पर्चा भी बनाया गया था। इसके बावजूद भी उक्त भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास बन भी गया। साथ ही बताया कि आरोपी पर 91 की कार्रवाई कर जेल भी भेजा गया था। लेकिन प्रभावशाली होने के कारण आरोपी ने ग्राम पंचायत के अधिकारियों से सांठगांठ कर विवादित भूमि पर प्रधानमंत्री आवास बनाकर कब्जा कर लिया। ऐसे में राजस्व विभाग पर सवालिया निशान लग रहा है।
-उक्त आवास पलाई ग्राम पंचायत ने स्वीकृत किया था। लाभार्थी को इसका भुगतान भी वहीं से हुआ है हुकूमपुरा गांव पहले पलाई ग्राम पंचायत में आता था।
मुकुट धाकड़, कार्यवाहक ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत, बोसरिया
-लाभार्थी ने उस समय दूसरी जमीन के कागज दिखाकर लाभ लिया था, जिसका हमें पता नहीं है और अब तो लाभार्थी को आवास का पूरा भुगतान भी कर दिया गया।
जसराम मीना, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत, पलाई
-आवास मेरे आने से पहले ही बन गया था। मैंने 91 की कार्रवाई की थी, जिसमे लाभार्थी को सजा भी और बेदखली के लिए उच्चाधिकारियों को भी लिखा था। लेकिन आगे से आवास को तोडऩे के लिए आदेश नहीं आए।
दसरथ ङ्क्षसह मीणा, कार्यवाहक तहसीलदार, नगरफोर्ट
Published on:
07 Jan 2023 05:25 pm
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