
टोंक. राजस्थान से करीब 20 साल बाद तथा टोंक जिले से पहली बार किसी क्रिकेट खिलाड़ी का टीम इंडिया में वनडे के लिए चयन हुआ है।
टोंक. राजस्थान से करीब 20 साल बाद तथा टोंक जिले से पहली बार किसी क्रिकेट खिलाड़ी का टीम इंडिया में वनडे के लिए चयन हुआ है। ये चयन टोंक के तेज गेंदबाज खलील अहमद का हुआ है। खलील ने दस वर्ष की उम्र में चोरी छुपे क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उसके पिता इससे नाराज भी थे, लेकिन अब इंडिया टीम में चयन होने पर उनकी आंखों में आंसू आ गए।
खलील15 सितम्बर से दुबई में होने वाले एशिया कप में टीम इंडिया से खेलेंगे। इससे पहले राजस्थान से टीम में करीब 20 साल पहले गगन खोड़ा वनडे में खेले थे। लम्बे अंतराल के बाद राजस्थान से खलील का टीम में इंडिया में चयन हुआ है।
उसके चयन पर टोंक में खुशियों का माहौल है। शहर के मछली बाजार स्थित घर में ईद की तरह खुशियां मनाई गई। जिला क्रिकेट संघ से जुड़े खिलाडिय़ों ने जमकर आतिशबाजी की और मिठाई खिलाई। खलील के चयन पर पिता खुर्शीद अहमद की आंखों में खुशियों के आंसू भर आए।
वे शब्दों में ये खुशी बयां नहीं कर पा रहे थे। बस इतना है कि आज फर्क है कि जो सपना देखा था वो आज पूरा होने वाला है। खलील भी माता-पिता के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोडऩे को कह रहा है।
द्रविड व जहीर है आदर्श
खलील इन दिनों टोंक ही है। बीसीसीआई से उन्हें मोबाइल फोन पर मिली सूचना के बाद पता चला कि उसका चयन टीम में एशिया कप के लिए हुआ है। खलील ने कहा कि उसके आदर्श टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी राहुल द्रविड तथा तेज गेंदबाज जहीर अहमद है। वे दोनों का रिकॉर्ड तोडऩा चाहते हैं। खलील ने कहा कि वे गेंदबाजी में जहीर को आदर्श मानते हैं और उनसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकेट लेना चाहते हैं।
गली से वल्र्डकप तक का सफर
शहर के बावड़ी क्षेत्र में रहने वाले मेलनर्स खुर्शीद अहमद के पुत्र खलील अहमद ने सालों में बांगलादेश में होने वाले अंडर-17 वल्र्ड कप के लिए टीम इंडिया में जगह बनाई थी। गेंदबाजी का लोहा मनवाकर खलील शहर की गली से वल्र्ड कप तक पहुंचा था।
मध्यम दर्जे वाले परिवार में जन्मे खलील ने सआदत पैवेलियन तथा गांधी खेल मैदान से क्रिकेट की शुरुआत की। शुरुआती दौर में पिता खुर्शीद क्रिकेट से नाराज थे। दोस्तों के साथ चोरी-छिपे क्रिकेट खेलना जारी रखा। एक बार तो हद हो गई जब खेलने के लिए खलील दोस्त की साइकिल लेकर गांधी खेल मैदान पहुंच गया।
यहां किसी वाहन की टक्कर से साइकिल टूट गई। बाद में दोस्त उसके घर आया और मरम्मत के रुपए मांगने लगा, लेकिन पिता के डर से वह दोस्त से रुपए नहीं होने की गुजारिश करने लगा। जब खुर्शीद घर से बाहर आए तो सारा माजरा समझा और खलील के दोस्त को साइकिल मरम्मत के रुपए दिए।
इसके बाद खुर्शीद ने उसे नई साइकिल लाकर दी, लेकिन यह नई साइकिल भी गांधी खेल मैदान से चोरी हो गई। इसके बाद खलील पिता की बाइक को चोरी-छिपे ले जाने लगा। पिता की ओर से नहीं खेलने के लिए ज्यादा दबाव पड़ा तो जिला क्रिकेट संघ के कोच इम्तियाज अली ने खुर्शीद को समझाया।
इसके बाद खलील ने पीछे मुडकऱ नहीं देखा और अपनी गेंदबाजी का लोहा श्रीलंका तक मनवाया। खलील को टीम इण्डिया के पूर्वकप्तान राहुल द्रविड तक ने भी सराहा। खलील ने बताया कि हर प्रतियोगिता में वह कोच इम्तियाज अली से सलाह लेता था। इसका फायदा भी उसे मिला। शहर में संसाधानों की कमी उसे खलती रही, लेकिन कमी के बावजूद हौसले को नहीं छोड़ा।
ऐसे की शुरुआत
खलील ने शिक्षा विभाग की जिला स्तरीय समेत जिले में होने वाली प्रतियोगिताओं से शुरुआत की। वर्ष2009 में उसका चयन अंडर-14 की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए राजस्थान से हुआ। इसी साल उसने राजसिंह डूंगरपुर ट्रॉफी में बेहतरीन गेंदबाजी की। वर्ष 2010 तथा 2011 में अंडर-16 में उसका चयन हुआ।
मोहाली में वर्ष2011 में आयोजित बोलिंग शिविर में उसका चयन हुआ। इसके बाद उसने वर्ष2013 में कूच बिहार, वर्ष2014 में विनू मांकड ट्रॉफी में गेंदबाजी के दम पर एनसीएम के बैंगलूरू शिविर में चयन हुआ।यहां इण्डिया टीम के पूर्वकप्तान राहुल द्रविड के नेतृत्व में और निखार आया।
इस दौरान उसने सेंट्रल जोन से खेलते हुए साउथ जोन के खिलाफ एक ही मैच में 9 विकेट झटके। इन्हीं प्रतिभा के बूते श्रीलंका में हुईअंडर-19 चैलेंजर ट्रॉफी में गेंदबाजी का बेहतर प्रदर्शन किया।इसके बाद बांगलादेश में हुए अंडर-19 वल्र्डकप में खलील टीम इण्डिया की ओर से खेले। अब वे एशिया कप में टीम इण्डिया की ओर से खेलेंगे।
Published on:
01 Sept 2018 05:29 pm
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