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आओं गांव चले: चार सौ साल पूर्व बसा था राणा गुर्जर के नाम पर बसा रानोली गांव

आओं गांव चले: चार सौ साल पूर्व बसा था राणा गुर्जर के नाम पर बसा रानोली गांव

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आओं गांव चले: चार सौ साल पूर्व बसा था राणा गुर्जर के नाम पर बसा रानोली गांव

आओं गांव चले: चार सौ साल पूर्व बसा था राणा गुर्जर के नाम पर बसा रानोली गांव

टोंक जिले व जयपुर जिला की सीमा पर आखिरी छोर पर स्थित गांव रानोली करीबन 400 साल पुराना है। यहां एक शिव मंदिर भी बना हुआ है, जिस पर क्षेत्र के लोगों की अगाध श्रद्धा है। किवदंती है कि राणा गुर्जर के नाम पर ही इस गांव का नाम रानोली पड़ा है। बाद में इस गांव पर नाथावत, बारां गांव के लोगों का भी आधिपत्य रहा बताया।

वर्तमान में रानोली गांव की कुल जनसंख्या 5000 से अधिक है तथा 1500 घरों की आबादी है, जिसमें सभी जातियों के लोग यहां निवास कर रही है। यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। गांव की कृषि योग्य भूमि लगभग 52000 बीघा है, जिनमें मुख्य रुप से मूंगफली व सरसों अधिक होती हैं।

कृषक जुटाई बुवाई का कार्य ट्रैक्टर से ही करते हैं। यहां करीबन किसानों के पास 250 के करीब ट्रैक्टर हैं। सिंचाई के लिए कुओं एवं तालाब पर आश्रित रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि मासी नदी है जो भी लगभग 5 किलोमीटर दूर है साथ ही पानी भी 80 फीट की गहराई पर मिलता है। किसान बताते हैं कि बरसात अच्छी होने पर तालाब भर जाता है। यहां ग्राम पंचायत ने क्षेत्र के लोगों के पर्यावरण को लेकर भूतेश्वर पार्क का निर्माण कराया है, जहां लोग रोजाना भ्रमण करके आनंद लेते हैं।

गांव रानोली में 700 बीघा भूमि चारागाह की है, जिसमें से 333 बीघा बीसलपुर के विस्थापितों के लिए आवंटित तथा 20 बीघा पर अवैध कब्जा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले वहां गलीचा का व्यवसाय बड़े पैमाने पर होता था, लेकिन अब धीरे-धीरे लुप्त हो चुका है साथ ही कुटीर उद्योग धंधे मशीनरी के चलते खत्म हो चुके हैं। शिक्षा के लिए यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सहित कई निजी विद्यालय व निजी कॉलेज हैं।


यहां के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों से अधिक छात्राओं की संख्या है। आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हैं। चिकित्सा के लिए गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व आयुर्वेदिक औषधालय हैं। पीने के पानी के लिए वर्तमान में पंचायत को जल जीवन मिशन योजना के तहत घर-घर नल कनेक्शन से जोड़े जाने का कार्य चल रहा है। आवागमन की दृष्टि से यह गांव पीपलू-जयपुर सडक़ मार्ग से जुड़ा हुआ है, लेकिन सडक़ मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण संचालित रोडवेज की बसे बंद हो गई है। यहां के किसान अपनी फसलों को बेचने के लिए निवाई में मालपुरा तथा फागी कृषि मंडी में लेकर जाते हैं।


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