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बरसात में बह गया 10 लाख से बनाया नाला

देवली ग्राम पंचायत की ओर से चिरोंज गांव में करीब 10 लाख रुपए की लागत से पानी निकास के लिए बनाया गया पानी का दबाव नहीं झेल पाया और जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होकर धंस गया। ऐसे में नाले का पानी आस-पास के मकान और खेतों में भर गया।

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बरसात में बह गया 10 लाख से बनाया नाला

बरसात में बह गया 10 लाख से बनाया नाला

टोंक . शहर के समीप देवली ग्राम पंचायत की ओर से चिरोंज गांव में करीब 10 लाख रुपए की लागत से पानी निकास के लिए बनाया गया पानी का दबाव नहीं झेल पाया और जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होकर धंस गया। ऐसे में नाले का पानी आस-पास के मकान और खेतों में भर गया।

ऐसे में किसानों और लोगों को नुकसान का सामना करना पड़ा। ग्रामीण राजेश, कैलाशी देवी, गणेश, रामजीलाल आदि ने बताया कि वर्ष 2019-2020 में नाला निर्माण किया गया था। निर्माण सामग्री में बरती गई लापरवाही के चलते नाला टूटने से खेतों से पानी गुजर गया, इससे किसानों की फसलें नष्ट हो गई। वहीं गहरे गड्ऐ हो गए।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया की कार्य के दौरान लापरवाही बरती गई। ग्रामीणों ने नाला पुन: निर्माण करने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इधर, ग्रामीण विकास अधिकारी हामिदुद्दीन खान ने बताया कि तेज बरसात के चलते नाला क्षतिग्रस्त हो गया।

वहीं सरपंच कमलेश कुमार ने बताया कि ठेकेदार से उक्त नाले का दोबारा निर्माण कराया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि नाला करीब 100 मीटर तक जगह-जगह से टूट गया और जमीन में धंस गया। इसके बाद पानी के बहाव के आगे बहने से नुकसान हुआ है।

पाळ क्षतिग्रस्त, मरम्मत कराई
दूनी. बंथली पंचायत के विजयगढ़ गांव स्थित गडूलिया नाड़ी की पाळ क्षतिग्रस्त हो गई। पंचायत ने उसकी तुरंत मरम्मत कराई। यह नाड़ी करीब 15 साल बाद लबालब हुई है। ऐसे में कटाव से पाळ क्षतिग्रस्त हो गई। सरपंच श्यामसिंह राजावत की सूचना पर उपसरपंच छगनलाल माली ने मिट्टी के बेग लगाकर उसकी मरम्मत की।


सरपंच ने बताया कि तीन दिन से चल रही बरसात के बाद गडूलिया नाड़ी लबालब होकर कटाव के कारण पाळ क्षतिग्रस्त होकर उसमें गहरा गड्ढ़ा हो गया। सूचना पर जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों को क्षतिग्रस्त पाळ की मरम्मत के लिए बुलाया, लेकिन मार्ग नहीं होने एवं मरम्मत के दौरान जान-माल का खतरा होने पर सभी ने मना कर दिया। ऐसे में उपसरपंच सहित राजू, रामकिशन, भगवान, रीतिक, राधेश्याम एवं रणजीत ने तगारी-फावड़े से ही क्षतिग्रस्त पाळ की मरम्मत कर दी।