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8 सौ वर्ष पूर्व प्रकट हुई थी निवाई में कंकाली माता, लोगों की अटूट है आस्था

8 सौ वर्ष पूर्व प्रकट हुई थी निवाई में कंकाली माता, लोगों की अटूट है आस्था  

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8 सौ वर्ष पूर्व प्रकट हुई थी निवाई में कंकाली माता, लोगों की अटूट है आस्था

8 सौ वर्ष पूर्व प्रकट हुई थी निवाई में कंकाली माता, लोगों की अटूट है आस्था

निवाई. ऋ षि मुनियों की तपोभूमि निवाई के गणगौरी बाजार में करीब 800 वर्ष पूर्व धरती की कोख से प्रकट हुई कंकाली माता का मंदिर स्थापित है। बुजुर्ग बताते है कि जयपुर दरबार ने झिलाय नरेश को संदेश भेजकर मां कंकाली का मंदिर निर्माण व प्राण प्रतिष्ठा करवाने का आदेश दिया था, जिस पर ने छतरीनूमा चबूतरा बनवाकर कंकाली माता की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई थी।

किदवन्तियों व श्रीशक्ति पीठ सेवा संस्थान के शंकरलाल सोनी के अनुसार जयपुर एवं झिलाय दरबार स्वयं या उनका कोई भी प्रतिनिधि प्रत्येक नवरात्रा में माता के दरबार में पूजा अर्चना करने और प्रत्येक नवरात्र की अष्ठमी को जयपुर दरबार अपने पूरे परिवार के साथ राजशाही अन्दाज में माता के दरबार में मत्था टेकने के लिए आते थे।

इसी बीच सहजमल नरूका नामक राजा ने निवाई नगर के साथ-साथ रक्ताचंल पर्वत के सिरमौर पर दुर्ग व तलहटी के मध्य में मंदिर एवं मायला बाग के समीप रानियों के महल का निर्माण करवा दिया। वहीं माता की ख्याति देख मुगल शासक औरंगजेब ने कंकाली माता व भगवान राधादामोदर तथा जलंधरनाथ महलों पर आक्रमण कर दिया।

मुगल शासक की सेना कुछ कर पाती इससे पूर्व ही माता के मंदिर की छतों पर लगी लाखों मधुमुख्खियों ने सैनिकों को निवाई से 5 किलोमीटर दूर भागकर दिया। इस पर मुगल शासक सेना सहित पुन: कंकाली माता, राधा दामोदर मंदिर व जलन्धर नाथ के महलों में पहुंचा और पूजा अर्चना करने के बाद सोने का छत्र चढ़ाया। इसका उल्लेख फ ारसी भाषा में मुख्य द्वारों पर लगे शिला लेख में भी है। कंकाली माता मंदिर में पिछले 35 वर्षों से माता के मंदिर में तेल व देशी घी की अखण्ड ज्योत जल रही है।


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