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विद्यालय का निरिक्षण कर सरपंच ने अव्यवस्थाओं पर अध्यापकों को लगाई लताड़, कहा शर्मिंदा हो रही गांव की बेटियां

निरीक्षण के दौरान कक्ष के अभाव में दो साल से आलमारी में रखे कम्प्यूटरों को बाहर निकाल बच्चों को शिक्षा देने के निर्देश दिए।

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School inspection

बंथली क्षेत्र के रा. उ. मा. विद्यालय बडा़ेली में आलमारी में रखे कम्प्यूटर उपकरणों का निरीक्षण करती सरपंच।

बंथली. रा. उ. मा. विद्यालय बडा़ेली का सरपंच शिमलादेवी मीणा ने निरीक्षण कर बालिका शोचालय, परिसर, भवन सहित अन्य की हालत देख मौजूद अध्यापकों को जमकर लताड़ लगा कहा प्रधानाध्यापक सहित अध्यापकों की लापरवाही से गांव की बेटियों को शर्मिंदा होना पड़ रहा है इसके बाद उन्होंने पुरे भवन का निरीक्षण कर पाई अनियमितताओं को पत्र के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत करा कार्रवाई की मांग करने की चेतावनी दी ।

सरपंच ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक प्रधानाध्यापक की लापरवाही सामने आई। बालिकाओं व विद्यालय में कार्यरत एकमात्र शिक्षिका ने सरपंच को शोचालय परिसर के कोने में होने व दीवारें छोटी होने व दरवाजे की कुन्दी खराब होने से उन्हें परेशान होना पड़ रहा है

ओर भय भी लगने की बात कह कई बार प्रधानाचार्य नत्थूलाल राव को अवगत कराए जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है इस पर प्रधानाचार्य के मिटिंग में होने पर मौजूद कार्यवाहक प्रधानाचार्य व अन्य अध्यापकों को जमकर लताड़ लगाई ओर कहा कि गांव की बेटियां शर्मिंदा हो रही है ओर सब चुपचाप बेठे हो शर्म आनी चाहिएं।

इसके बाद निरीक्षण के दौरान कक्ष के अभाव में दो साल से आलमारी में रखे कम्प्यूटरों को बाहर निकाल बच्चों को शिक्षा देने के निर्देश दिए। बाद में सरपंच ने भवन एवं परिसर का निरीक्षण किया ओर विद्यार्थियों से पानी भरने व सफाई जेसे कार्य नहीं कराए जाने की चेतावनी दी।

इस पर विद्यालय प्रशासन ने विद्यालय खर्च पर जल्दी ही चतुर्थश्रेणी कर्मचारी रखने का आश्वासन दिया। गौरतलब है विद्यार्थियों की व्यथा देख राजस्थान पत्रिका के टोंक संस्करण में 23 जुलाई को शीर्षक ‘पानी-सफाई की जिम्मेदारी मासूमों की’ से समाचार प्रकाशित किया गया था।


दुध नहीं भा रहा बच्चें को
सरकार ने कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण दुध देने के विद्यालयों को निर्देश दिए थे मगर अध्यापकों की लापरवाही के चलते दुध गुणवत्तापूर्ण नहीं आने से बच्चों को दुध नहीं भा रहा ओर बच्चें पीने के बजाय नजरें बचाकर इधर-उधर फेंक रहे है। गुरुवार को तो बच्चों ने दुध को खट्टा होना बताया। साथ ही प्रभारी बने इस मलाईदार दुध को 200 एमएल की बजाय कम मात्रा में उपलब्ध करवा रहे है।