
सिद्ध चक्र मण्डल विधान को सजाकर श्रद्धालुओं ने समवशरण की रचना की
निवाई. आचार्य विभव सागर के सान्निध्य में गुरुवार को जैन समाज की ओर से शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय सिद्ध चक्र मण्डल विधान की तीसरे दिन भगवान शांतिनाथ की वृहद शांतिधारा संगीत के साथ की। चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता विमल जौंला ने बताया कि विधान में सैकडों श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ चन्द्र प्रभु शांतिनाथ पाŸवनाथ एवं महावीर स्वामी के अभिषेक कर पूजा अर्चना की।
जौंला ने बताया कि विधान की पूजा में चौथे वलय की आराधना करके इन्द्र इन्द्राणियों ने 6 4 श्रीफ ल अघ्र्य समर्पित किए। इस अवसर पर आचार्य विभव सागर ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान की पूजा अर्चना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और सुख दु:ख तो आते जाते हैं।
अपने अपने कर्मो का फ ल सबको मिलता है। इस अवसर पर हेमचन्द, प्रेमचन्द, विमल भाणजा राजेश, कमलेश जैन, लालचन्द जैन, महेन्द्र भाणजा, सुशील गिन्दोडी, योगेन्द्र सिंहल, महेश जैन, गिर्राज जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थें।
श्रावक-श्राविकाओं ने की आराधना
निवाई.सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य विभव सागर के सान्निध्य में शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र मण्डल विधान की गाजे बाजे से महा अर्चना हुई, जिसमें प्रथम बार 300 श्रावक श्राविकाओं ने एकसाथ महा आराधना की। चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता विमल जौंला ने बताया कि विधान की शुरुआत शांतिनाथ भगवान के समक्ष चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष विनोद जैन, गिर्राज जैन, सुशील गिन्दोडी एवं योगेन्द्र सिंहल ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इसके बाद भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा की गई। सोधर्म इन्द्र महेन्द्र जैन, धनपति कुबेर नेमीचंद जैन, ईशान इन्द्र अशोक जैन, यज्ञनायक नरेश पाटनी, माहेन्द्र इन्द्र महेन्द्र जैन, सानत इन्द्र धर्मचन्द जैन, श्रीपाल मैना सुन्दरी मोहनलाल जैन एवं ध्वजारोहणकर्ता सुशील नीरा जैन ने भक्ति नृत्य किया। जौंला ने बताया कि विधान के तहत सभी इन्द्र इन्द्राणियों ने सिद्ध चक्र के जाप णमोकार महामंत्र के जाप का उच्चारण किया।
Published on:
04 Oct 2019 03:44 pm
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