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माटी से जुड़े खेलों को सूची से किया बाहर, रस्सा कस्सी, सतौलिया सहित 16 खेलों को हटाया

कई खेल ग्रामीण अंचल की पहचान है। आज भी वो खेल खेले जाते हैं। उन्हें अब स्कूल की खेल प्रतियोताओं में शामिल नहीं किया गया है। जबकि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रतियोगिता के कैलेंडर के अनुसार 67वीं स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं में 16 खेलों को प्रतियोगिताओं से हटा दिया है।  

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माटी से जुड़े खेलों को सूची से किया बाहर, रस्सा कस्सी, सतौलिया सहित 16 खेलों को हटाया

माटी से जुड़े खेलों को सूची से किया बाहर, रस्सा कस्सी, सतौलिया सहित 16 खेलों को हटाया

टोंक/ नटवाड़ा. एक ओर जहां प्रदेश में निचले स्तर पर खेल प्रतिभाओं में खेलों का माहौल बनाने व खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर उन्हे तराश कर खेलों के प्रति रूचि बनाए रखने के मकसद से राज्य सरकार खेलों का महाकुंभ राजीव गांधी ग्रामीण व शहरी ओलंपिक में पानी की तरह पैसा बहा रही है। वहीं स्कूल गेम्स फैडरेशन ऑफ इण्डिया के सामने लाचार राज्य सरकार ने स्कूली खेल प्रतियोगिताओं से 16 खेल गायब कर माटी से जुड़े पारंपरिक खेलों को माटी में मिलाने की तैयारी कर ली है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी प्रतियोगिता के कैलेंडर के अनुसार अगस्त माह में शुरू होने वाली 67वीं जिला स्तरीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं में इस बार रस्सा कस्सी, सतौलिया सहित 16 खेलों को खेल प्रतियोगिताओं से हटा दिया गया है। पिछले सत्र में कुल 49 खेलों की प्रतियोगिताएं हुई थीं। जबकि इस बार केवल 33 खेलों को ही शामिल किया गया है।

ये 33 खेल प्रतियोगिता में शामिल रहेंगे:
स्कूल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में इस बार हॉकी, हैंडबॉल, कुश्ती, वॉलीबॉल, वेट लिङ्क्षफ्टग, सॉफ्टबॉल, तीरंदाजी, बास्केटबॉल, योगा, रग्बी फुटबॉल, बॉङ्क्षक्सग, बैडङ्क्षमटन, फुटबॉल, तैराकी, टेबल टेनिस, जिम्रास्टिक, कराटे, शतरंज, नेटबॉल, खो-खो, साईङ्क्षक्लग ट्रेक व रोड, राईफल शूङ्क्षटग, लॉन टेनिस, कबड्डी, ताईक्वांडो, जूडो, सेपक टकरा, क्रिकेट, वुशु, रोलर स्केङ्क्षटग, मलखंभ एवं एथलेटिक्स को शामिल किया गया है।

इन खेलों को हटाया गया
शिक्षा विभाग ने इस बार लगौरी (सतौलिया), टग ऑफ वार, कूडो, कैरम, मार्शल स्कॉय, आस्थे दा अखाड़ा, पॉवर लिङ्क्षफ्टग, स्पीड बॉल, थ्रो बॉल, रोल बॉल, शूङ्क्षटग बॉल, बाल बैडङ्क्षमटन, टेनिस वॉलीबॉल, टेनिस क्रिकेट, सुपर सेवन क्रिकेट व टेनिस बॉल क्रिकेट को हटाया है।

शिक्षा विभाग की मजबूरी
जानकार लोगों ने बताया कि गत वर्ष प्रतियोगिता में ये खेल जोड़े गए थे। इनकी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई मान्यता भी नहीं है। जिन्हें कोच व संसाधनों के अभाव में बच्चों को खेलने का मौका नहीं दिया गया था। ऐसे में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सख्ती दिखाई तो शिक्षा विभाग ने कई नए खेल हटा दिए।

खेल विशेषज्ञ बोले

प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल विजेता खिलाड़ी कर्तिका चौधरी ने बताया कि स्कूली प्रतियोगिताओं से कुछ पारंपरिक खेलों को हटाया गया है। अगर शिक्षा विभाग हमें इस तरह के खेल नहीं खेलने देगा तो हमारी विरासत ही खत्म हो जाएगी। राजस्थान शिक्षक संघ, प्रगतिशील के टोंक ब्लॉक अध्यक्ष राजाराम जाट ने बताया कि खेलों में कटौती की बजाए उनकी संख्या बढ़ाने की जरूरत है। सतोलिया, आस्थे दा अखाड़ा, रस्साकस्सी सरीखे परम्परागत खेल विद्यालयों में नहीं खिलाए जाएंगे। इससे अवसर भी सीमित हो जाएंगे।

-इस बार 33 खेल प्रतियोगिताओ का आयोजन होगा। प्रतियोगिताओ में खेलों को शामिल करना एवं हटाना ऊपरी तौर पर कमेटी का निर्णय है। सरकार या खेल कमेटी ही जाने की इस बार 16 खेलों को कैलेंडर से क्यों हटाया।
रामप्रसाद मीना, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी(खेल) माध्यमिक टोंक