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राजस्थान मिशन 2030: कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए हितधारकों ने दिए सुझाव

जिला मुख्यालय पर स्थित आत्मा सभागार में कृषि विभाग की और से राजस्थान मिशन 2030 हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन हुआ। जिसमें हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करने हेतु कार्यशाला आयोजित की गई। आमंत्रित हितधारकों ने कृषि की तकनीकी में सुधार और बदलाव के क्षेत्र में दस्तावेज बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।

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राजस्थान मिशन 2030:  कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए हितधारकों ने दिए सुझाव

राजस्थान मिशन 2030: कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए हितधारकों ने दिए सुझाव

टोंक. जिला मुख्यालय पर स्थित आत्मा सभागार में कृषि विभाग की और से राजस्थान मिशन 2030 हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन जयपुर खण्ड के अतिरिक्त निदेशक रामलाल मीणा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ जिसमें हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करने हेतु कार्यशाला आयोजित की गई। आमंत्रित हितधारकों ने कृषि की तकनीकी में सुधार और बदलाव के क्षेत्र में दस्तावेज बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।

अतिरिक्त निदेशक रामलाल मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में प्रदेश भर में चलाए जा रहे विजन 2030 अभियान के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि में नवीनतम तकनीक से ही कृषकों की आय में बढोतरी संभव है। आज के युग में कृषि क्षेत्र में नित नए नवाचार किए जा रहे है। आधुनिक खेती से लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है ।

कृषि एवं उद्यान द्वारा संचालित पोली हाउस, लो-टनल, प्याज हाउस, सोलर संयन्त्र, कृषि विभाग की तारबन्दी, फार्म पौण्ड, कृषि के कृषि उपकरण भी नित प्रतिदिन कम खर्चे में अधिक कार्य करने वाले यंत्र भी विकसित किए जा रहे है।

जिसके तहत रिजबेड मेकर की सहायता से कम समय में अधिक उठी हुई क्यारियां बनाने में काफी उपयोगी सिद्ध हुआ है। कृषि जगत में कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि क्षेत्र में काफी अच्छा कार्य किया है।

सोच के साथ सभी हितधारकों को विकासवादी सोच के साथ अपने सुझाव प्रस्तुत करने का आह्वान किया जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग कृषि की तकनीक का ज्ञान उपलब्ध हो सके और राजस्थान भारत का नंबर वन राज्य बन सके। कृषि क्षेत्र के परिदृश्य में दिनों दिन हो रही प्रगति की चर्चा करते हुए भविष्य का खाका तैयार करने की बात रखी।

राजस्थान मिशन 2030 जिला कार्यक्रम प्रभारी अधिकारी एवं उद्यान आयुक्तालय के संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश गिल ने कहा कि किसानों को फसलों एवं सब्जियों में कीटनाशकों व रासयनिक उर्वरकों का कम से कम उपयोग करना चाहिए।

संयुक्त निदेशक केके मंगल ने कहा कि कृषि विभाग एवं उद्यान विभाग के प्रगतिशील कृषक, नवाचारी कृषक, जन प्रतिनिधि, कृषि विपणन बोर्ड, कृषि विज्ञान केन्द्र, एफपीओ, नाबार्ड, आरएसएससी व एनएससीए सहकारी समितियों, आदान विक्रेता संघ आदि के अधिकारी, कार्मिकगण एवं विभागीय योजनाओं के चुने हुए लाभार्थी, कृषि संकाय में अध्ययनरत विद्यार्थी आदि हितधारक शामिल हुए।

विशेष रूप से यूरिया की समस्या का स्थायी निवाई में रैक पॉइन्ट स्थापित करने, कृषि योजनाओं में अनुदान बढ़ाने, कृषक उत्पादक संगठनों के सुदृड़ीकरण, किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने, कृषि महाविद्यालय में सुविधाओं के विकास, किसानों को समय पर आदान खाद बीज की व्यवस्थाएं करने के बारे में विभिन्न सुझाव प्राप्त हुए।

प्रदेश को देश में अग्रणी स्थान पर स्थापित करने हेतु चल रहे राजस्थान मिशन-2030 अभियान के तहत कृषि विभाग की और से राजस्थान मिशन-2030 दस्तावेज के लिए आगामी गतिविधियों तथा उसे तैयार होने वाले विजन डॉक्युमेंट की तकनीकी जानकारी देते हुए तय प्रक्रिया में बिंदुवार सुझाव आमंत्रित किए। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य छोगालाल गुर्जर ने कहा कि फार्म पौण्ड पर अनुदान बढाया जाऐं, जिससें किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हों।

जिला परिषद सदस्य घीसी देवी गुर्जर ने कहा कि फसल बीमा योजनाओं को पारदर्शी बनाने पर जोरदिया, इस अवसर पर परियोजना निदेशक दिनेश कुमार बैरवा, उपनिदेशक उद्यान राजेन्द्र कुमार सामोता, सहायक निदेशक रामपाल शर्मा, कृषि वैज्ञानिक के प्रधान वैज्ञानिक डा डीवी सिंह, कृषि महाविद्यालय झिलाय के डीन डॉ आरपी जाट, राजस्थान बीज निगम में डॉ निर्मला वर्मा, सहायक निदेशक डॉ प्रमोद यादव, कृषि आदान विक्रेता आरएन विजय,अजीत गुप्ता, कृषि आदान विक्रेता राजेश जोधपुरिया, सहकारिता विभाग के प्रबन्धक विक्रम चौधरी, जैविक खेती नवहिन्द चौधरी, मोहनलाल नागर सहित अनेक प्रगतिशील कृषक मौजूद थें।

फोटो. टोंक आत्मा सभागार में आयोजित राजस्थान मिशन 2030 में परामर्श कार्यशाला में मौजूद अतिथि एवं प्रगतिशील कृषक


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