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video : दवा से पहले दर्द दे रहा सबसे बड़ा अस्पताल

सआदत अस्पताल में आमूलचूल परिवर्तन के सपने दिखाए जा रहे हैं। जबकि वास्तविकता इसके विपरित है।

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सआदत अस्पताल

टोंक सआदत अस्पताल में स्टे्रचर पर मरीज ले जाता परिजन।

टोंक. सआदत अस्पताल में आमूलचूल परिवर्तन के सपने दिखाए जा रहे हैं। जबकि वास्तविकता इसके विपरित है। जिले का सबसे बड़ा सआदत अस्पताल हादसों में घायलों व मरीजों को राहत के स्थान पर दर्द बांट रहा है। रोगी के अस्पताल आने पर एक्स-रे, ईसीजी, आईसीयू, सोनोग्राफी के लिए अस्पताल परिसर में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

जबकि सांसद, विधायक समेत अन्य कई जनप्रतिनिधि आए दिन निरीक्षण के दौरान सुविधाएं बढ़ाने के दावे तो करते हैं, लेकिन समस्या जस की तस है। उल्लेखनीय है कि ससांधनों होने के बावजूद मरीजों को तत्काल राहत पहुंचाने के प्रति अस्पताल प्रशासन उदासीन है।

आलम यह है कि सआदत अस्पताल पहुंचे मरीजों को सोनोग्राफी कराने आधा किलोमीटर दूर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल जाना पड़ रहा है। जबकि पूर्व में यहां सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध थी। छह वर्ष बीतने के बावजूद अस्पताल में वेंटीलेटर अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। यूनिट में बने अन्य कक्षों का भी अस्थि ऑपरेशन समेत अन्य कार्यों में ही उपयोग किया जा रहा है। ट्रोमा यूनिट की सुविधा होने के बावजूद मरीजों को जयपुर रैफर किया जा रहा है।

दूसरी ओर हाइटेक जमाने में भी मरीजों के किए जा रहे एक्स-रे हाथ से धोए व सुखाए जा रहे है। इसका कारण गत दिनों एक्स-रे रूम में लगी आग में एक्स-रे फिल्म ऑटो प्रोसेसर मशीन का जल जाना है। इससे मरीजों को एक्स-रे लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। आलम यह है कि एक्स-रे मिलने तक चिकित्सकों के घर लौटने का समय हो चुका होता है। इससे पहले मशीन होने से एक्स-रे ५ से १० मिनट मे मरीजों को उपलब्ध हो रहे थे।


जांचें बाहर तो ईसीजी अन्दर
सआदत अस्पताल में रक्त संबंधी नि:शुल्क जांचें, एक्स-रे व ईसीजी अस्पताल अलग-अलग स्थानों पर हो रही है। विभिन्न स्थानों पर जांचे की व्यवस्था होने से मरीज व परिजन अस्पताल की परिक्रमा लगाने पर विवश है। अधिकांश जांचें बाहर एक कक्ष में की जा रही है। जबकि ईसीजी जांच गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के पास तथा एक्स-रे अस्पताल परिसर में ही किए जा रहे है।


ईसीजी करे या मरीज सम्भाले
ईसीजी की जांच का भार भी आईसीयू कक्ष में तैनात नर्सेजकर्मी पर ही होने से मरीज घंटों ईसीजी जांच की प्रतीक्षा करते रहते है। इस बीच आईसीयू में भर्ती गम्भीर रोगी रामभरोसे रहते है। दूसरी ओर आईसीयू में ऑक्सीजन प्रणाली तो लगी है, लेकिन कई बार खराबी होने से नर्सेज को मरीजों के पास सिलेण्डर रखने पड़ रहे है।


प्रशासन के बोल
प्रमुख चिकित्साधिकारी जे. पी. सालोदिया का कहना है कि सोनोग्राफी मशीन एक ही है, ऐसे में अधिक जरूरत एमसीएच में थी। व्यवस्था होने पर सआदत अस्पताल में भी सुविधा दी जाएगी। इसी प्रकार अन्य भी सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के निरीक्षण के दौरान समस्याएं बताई जाती रही है।