
शीतलहर की चपेट में आने से टमाटर की फसल चौपट होने के कगार पर
मालपुरा. उपखण्ड के अम्बापुरा, टोरडी, गोलीपुरा, जनकपुरा, रिण्डल्या, पीमूण, कस्बा मालपुरा सहित आस-पास के गांवों में बोई गई टमाटर की फसल शीतलहर के चपेट में आने से नष्ट होने लगी है। टोरडी के भंवरलाल मुवाल, गोलीपुरा राकेश सैनी सहित किसानों ने बताया कि उपखण्ड क्षेत्र में लगभग 500 बीघा में टमाटर की फसल की बुवाई की गई थी, जिससे किसानों को प्रति वर्ष एक बीघा में पचास हजार से एक लाख रुपए तक की आय होती थी
लेकिन शीतलहर के कारण तैयार फसल चौपट होने लग गई है। किसानों ने बताया कि टमाटर के साथ अन्य सब्जियों व सरसों में भी 20 से 25 प्रतिशत तक खराबे की आशंका बनी हुई है। सब्जी की फसल का बीमा भी नहीं होने से उनका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ऐसे करे बचाव
सहायक निदेशक कृषि विस्तार नागरमल यादव ने बताया कि फसलों में पाले की सम्भावना शाम को हवा बंद होने के बाद बनती है। इससे बचने के लिए फसल में हल्की सिंचाई करनी चाहिए, वहीं फसल को बचाने के लिए मेड़ पर चारों ओर सुबह 4 से 5 बजे के लगभग धुआं करना चाहिए तथा मापदण्डों अनुसार सरफ्यूलिक अल्म का घोल बनाकर स्प्रे करे। किसानों को सब्जियों की फसल में लोट अनल सीट का प्रयोग कर फसलों को बचाया जा सकता है।
हवाओं में गलन, कोहरे में लिपटा रहा टोंक
टोंक. दिसम्बर की समाप्ती बढऩे के साथ ही सर्दी भी तेज होने लगी है। हाइवे पर धुंध छाने से वाहनों की गति भी धीमी हो गई। ठिठुरन के बीच बाजार तो खुले, लेकिन अन्य दिनों की भांति देरी से व्यापारी आए। सुबह तो सन्नाटा रहा, लेकिन दोपहर में बाजार में खरीदारी रही। सुबह व शाम को लोगों ने अलावा जलाकर गर्मी पाई।
सर्दी के चलते लोगों की दिनचर्या में भी बदलाव आया है। सुबह देर से बिस्तर छोड़े गए तो शाम होते ही लोगों ने रजाइयों का सहारा ले लिया। सर्दी के चलते बाइक पर बेहद जरूरी कार्य ही किए गए। हवाएं ठंडी होने से सर्दी का अहसास तेज हो गया। वहीं सर्दी के चलते घरों में विशेष व्यंजन भी बनने शुरू हो गए। घरों में रात के समय आग जलाकर मूंगफली व गुड़ का आनंद लिया गया। बाजार में चाय, पकौड़ी, कचोरी, जलेबी, पिंडखजूर आदि की बिक्री भी बढ़ गई।
Published on:
20 Dec 2019 05:52 pm
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