
सात माह में 6 पॉजिटिव, 295 का इलाज जारी
टोंक. तीस साल से एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करना है। एड्स के प्रति लोगों को कई माध्यमों के द्वारा जागरूक किया जा रहा है। आज भी एड्स को लेकर समाज में कई तरह की भ्रंतियां लोगों दिमाग में जगह बनाए हुए है। अगर कोई महिला या पुरुष इस रोग की चपेट में आ जाता है तो उनकों घृणा की नजरों से देखा जाता है, जिससे कारण एड्स रोगी के दिमाग पर इसका विपरित असर पड़ता है।
जबकि सच्चाई यह है कि एड्स कोई छूत की बीमारी नहीं है। यह बीमारी सक्रमित खून चढ़ाने अथवा असुरक्षित यौन सम्बन्ध से फैलती है। लाइलाज बीमारी एड्स प्रचार प्रसार व जागरुकता के अभाव में पैर पसारती जा रही है। वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में मात्र दवा देने का ही कार्य किया जा रहा है। जानकारी के अभाव में लोग इस रोग की गिरफ्त में आते जा रहे है।
5362 की एड्स जांच
जिले में पिछले सात माह में अप्रेल 21 से अक्टूबर तक सआदत अस्पताल स्थित इन्टीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर पर 5362 की एड्स जांच की गई है, जिसमें से 6 जनों की जांच रिपार्ट पॉजिटिव आई है, जिनमें चार पुरुष व 2 महिलाएं शामिल है।
दो बच्चे भी संक्रमित मिले
राजकीय सआदत अस्पताल में संचालित इन्टीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर के अनुसार सआदत अस्पताल में शुरू हुए सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक अब 5362 की जांच की गई है जिनमें से 295 मरीजों को दवा दी जा रही है। सआदत अस्पताल के अधिन एमसीएच में भी 43 गर्भवती महिलाएं पॉजटिव पाई गई है। इसी तरह जिले के 37 बच्चों को भी उपचार के दौरान ठीक हुए है। 2 बच्चों की वर्तमान में दवा चल रही है। पॉजिटिव आई सभी की दवा चल रही है।
तीन माह की दवा का स्टॉक
सेंटर पर तीन माह की दवा का स्टॉक रखा जाता है। रोगियों में ज्यादातर ऐसे लोग शामिल है जो कार्य के सिलसिले में अधिकांश समय बाहर रहते है या वाहन चालक है। सभी रोगी की उम्र भी पचास वर्ष तक है।
तीन वर्षों में 45662 की जांच में 85 आए थे पॉजिटिव
इन्टीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर के अनुसार गत तीन वर्षो में 45662 जनों की एड्स जांच की गई थी, जिसमें से 2018-19 में 16500, 1920-21 में 16600 व 2020-21 में 7200 की जांच की गई गई थी। जांच में कुल 85 जनों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली थी।
बजट नहीं है कैसे करे जागरूक: सआदत अस्पताल में संचालित इन्टीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर के काउंसलसर वीरेन्द्र कुमार के अनुसार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर इस लाइलाज बीमारी से बचाव के प्रचार-प्रसार के लिए बजट भी नहीं है। ऐसे में एड्स दिवस पर राजकीय चिकित्सालयों में बैठक के अलावा कुछ भी गतिविधि नहीं हो पाती है। वहीं उपचार के अभाव में जागरुकता से ही उक्त रोग से बचा सकता है, जिसकी ओर विभाग की ध्यान नहीं है। जागरुकता के अभाव में उक्त रोगियों में एक दर्जन कैसे ऐसे है, जिनमें यह रोग पहले पहले पति फिर पत्नी को भी हो गया। विरेन्द्र कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से प्रचार-प्रसार व जागरुकता के लिए बजट नहीं आता है। चिह्नित रोगियों को सेंटर से दवाएं दी जा रही है।
Published on:
01 Dec 2021 05:11 pm
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