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मंत्रोच्चारण के साथ विश्वशांति महायज्ञ में दी आहुतियां

आचार्य इन्द्रनन्दी के सान्निध्य में अग्रवाल सेवा सदन में चल रहे आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान के समापन पर बुधवार को विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया गया

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टोंक

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Jalaluddin Khan

Nov 14, 2019

मंत्रोच्चारण के साथ विश्वशांति महायज्ञ में दी आहुतियां

मंत्रोच्चारण के साथ विश्वशांति महायज्ञ में दी आहुतियां

डिग्गी. आचार्य इन्द्रनन्दी के सान्निध्य में अग्रवाल सेवा सदन में चल रहे आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान के समापन पर बुधवार को विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के साथ हवन में आहुतियां दी।

सौधर्म इन्द्र बने प्रकाश चन्द जैन, धनपति कुबेर गोविन्द नारायण जैन, यज्ञनायक हुकमचन्द जैन, ईशान इन्द्र महावीरप्रसाद गोयल, चातुर्मास समिति अध्यक्ष महावीर सूराशाही, महेन्द्र पराणा जयपुर सहित बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री टोंक की देखरेख में विश्वशांति महायज्ञ में मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां दी।

अग्रवाल समाज चौरासी अध्यक्ष हुकमचन्द जैन प्रेस वालों ने बताया कि आचार्य इन्द्रनन्दी का ससंघ चातुर्मास समापन पर अग्रवाल सेवा सदन में गुरुवार को ससंघ का पिच्छी परिवर्तन समारोह व सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। दोपहर सवा 12 बजे मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, गुरु वंदना, विनयांजलि पूजन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, वस्त्र भेंट, पिच्छिका भेंट, आचार्य इन्द्रनन्दी के प्रवचन, अतिथि सम्मान सहित कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।


श्रीमद्भागवत कथा- धर्म की क्षति होने पर भगवान लेते है अवतार

देवली. धर्म व मानवता की क्षति होने पर स्वयं भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते है। हर युग में भगवान ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की है। यह बात कथावाचक पं तुलसीराम शास्त्री ने शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कही। उन्होंने कहा हर युग में भगवान ने अवतार लेकर असुरों को खत्म किया है।

कथावाचक ने राम जन्म, राम-लक्ष्मण सहित भाईयों की आश्रम में शिक्षा-दीक्षा, रावध वध, अयोध्या में भगवान राम का राजतिलक, सीता माता का धरती में समाधिस्थ होना, लवकुश कथा, कृष्ण बलराम की लीलाएं, गोवर्धन लीला, पूतना वध, कालिया दमन सहित वृत्तान्त सुनाएं। कथा के बीच भजनोंं पर महिलाओं ने नृत्य किया।

इससे पहले शुक्रवार को पं तुलसीराम ने कर्मफल को लेेकर राजा चित्रकेतकों को वृतान्त सुनाया। कथा के बीच समुद्र मंच, हिरण्यकश्यप वध, नरसिंह अवतार, वृत्रासुर वध, महर्षि दाधीची नारद का हरि रुप, भक्त प्रहलाद की कथा, राजा भागीरथी का गंगा लाना, राम-लक्ष्मण के जीवन वृत्तान्त का सजीव झांकी के साथ वर्णन किया गया। घनश्याम गौतम ने बताया कि कथा की आगामी 4 नवम्बर को पूर्णाहुति होगी।