
Bihar Diwas
Bihar Diwas 2025: हर साल 22 मार्च को बिहार दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस दिन की याद दिलाता है जब 1912 में बिहार बंगाल से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य बना था। हालांकि, जब भी बिहार की बात होती है, राजनीति सबसे पहले चर्चा में आ जाती है। चुनावी रणनीतियां, बड़े नेता और राजनीतिक हलचलें हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। लेकिन क्या बिहार सिर्फ राजनीति का गढ़ है? बिल्कुल नहीं!
यह राज्य ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक स्थलों और समृद्ध संस्कृति का अनमोल खजाना है। यहां की अनोखी जगहें इतनी आकर्षक हैं कि इन्हें देखने के बाद विदेश यात्रा की जरूरत ही महसूस नहीं होगी। इस बिहार दिवस (Bihar Diwas) पर आइए जानते हैं उन खास जगहों के बारे में जो आपको बिहार का एक नया और खूबसूरत चेहरा दिखाएंगी।
बिहार की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक राजगीर हर तरह के पर्यटकों के लिए परफेक्ट है। अगर आपको इतिहास पसंद है तो यह शहर महाभारत काल और बौद्ध धर्म से जुड़े कई रहस्यों को समेटे हुए है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यहां चारों तरफ हरियाली और पहाड़ों का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं। रोमांच पसंद करने वालों के लिए रोपवे का अनुभव और जंगलों के बीच ट्रैकिंग किसी एडवेंचर से कम नहीं।
यहां का सबसे खास आकर्षण विश्व शांति स्तूप है, जो सफेद संगमरमर से बना एक भव्य स्मारक है। इसे जापान के बौद्ध भिक्षुओं ने बनवाया था और यहां से पूरे राजगीर का नजारा मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। इसके अलावा, वेणुवन और गर्म पानी के कुंड भी देखने लायक जगहें हैं। जहां आकर आप सुकून का अनुभव कर सकते हैं।
अगर आप शांति की तलाश में हैं तो बोधगया से बेहतर जगह कोई नहीं। यही वह स्थान है, जहां भगवान गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। महाबोधि मंदिर यहां का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। यहां का बोधि वृक्ष बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल है और इसकी छांव में बैठकर ध्यान करने का अनुभव अविस्मरणीय होता है।
इसके अलावा यहां स्थित विशाल बुद्ध प्रतिमा भी एक बड़ा आकर्षण है, जो दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है। अगर आप आध्यात्मिकता को महसूस करना चाहते हैं तो बोधगया आपके लिए परफेक्ट जगह है।
बिहार के जंगलों की खूबसूरती को नजदीक से देखना चाहते हैं तो आपको वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की यात्रा जरूर करनी चाहिए। यह बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जो पश्चिम चंपारण जिले में नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। यहां की घनी हरियाली, शांत नदियां और दुर्लभ वन्यजीव इसे खास बनाते हैं।
यहां सफारी के दौरान आपको बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण और कई दुर्लभ पक्षी देखने को मिल सकते हैं। अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो जंगल सफारी का अनुभव आपके लिए रोमांच से भरपूर रहेगा। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं।
भागलपुर सिर्फ अपने शानदार भागलपुरी सिल्क के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी मशहूर है। यहां स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय प्राचीन काल में नालंदा की तरह ही शिक्षा का एक बड़ा केंद्र था। अगर आप इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखते हैं तो यह जगह आपको जरूर पसंद आएगी।
इसके अलावा यहां की गंगा डॉल्फिन सेंचुरी भी काफी खास है। गंगा नदी में पाई जाने वाली ये दुर्लभ डॉल्फिन पूरी दुनिया में सिर्फ कुछ ही स्थानों पर मिलती हैं और भागलपुर उनमें से एक है। अगर आप प्रकृति और वन्यजीव प्रेमी हैं तो यहां की यात्रा आपके लिए बेहद खास रहने वाली हैं।
अगर आप बिहार की पारंपरिक कला और संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं तो मधुबनी से बेहतर कोई जगह नहीं। यह शहर अपनी विश्वप्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग्स के लिए जाना जाता है, जो पूरी दुनिया में अपनी अनोखी शैली और जीवंत रंगों के कारण प्रसिद्ध हैं। यहां के गांवों में जाकर आप इन पारंपरिक चित्रों को बनते हुए देख सकते हैं और कलाकारों से बातचीत भी कर सकते हैं।
इसके अलावा मधुबनी की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य और गीत भी इसे एक अलग पहचान देते हैं। यहां का ग्रामीण जीवन बिहार की असली आत्मा को दर्शाता है।यहां जाकर आपको कला और परंपरा का एक अनूठा अनुभव मिलेगा।
Updated on:
22 Mar 2025 11:17 am
Published on:
22 Mar 2025 10:43 am
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