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ये हैं बॉलीवुड के ‘संस्कारी बाबू जी’, इनके जैसा नहीं है दूजा

आलोक नाथ ने हिंदी सिनेमा में हर तरह की भूमिका अदा की।

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alok nath

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बॉलीवुड में पिता के किरदार काफी फेमस रहे हैं। 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' में सिमरन के बाबू जी, जो सिर्फ अपने एक डायलॉग 'जा सिमरन जी ले अपनी जिंदगी' के लिए आज भी याद किए जाते हैं। इसी तरह बॉलीवुड के एक और एक्टर हैं जिन्होंने स्क्रीन पर पिता का रोल इस कदर निभाया कि पूरी इंडस्ट्री में उनकी 'संस्कारी बाबू जी' की ईमेज क्रिएट हो गई। वो हैं 'संस्कारी बाबू जी' आलोक नाथ।

आलोक नाथ ने हिंदी सिनेमा में हर तरह की भूमिका अदा की। उन्हें सूरज बड़जात्या और राजश्री प्रोडक्शन की फिल्मों में अच्छे पिता का किरदार निभाने से हिंदी सिनेमा में बेहद प्रसिद्धि मिली। जिस कारण दर्शक भी उन्हें बाबूजी कहने से कोई गुरेज नहीं करते। बड़े पर्दे पर उन्होंने 'विवाह', 'दे दे प्यार दे', 'सेकेंड हैंड हसबैंड', 'लाइफ में हंगामा है' जैसी फिल्मों में काम किया साथ ही छोटे पर्दे पर भी उन्होंने एक अच्छे पिता की भूमिका अदा की है ,जिनमे सीरियल 'बाबुल की विदाई', 'यंहा मैं घर-घर खेली' जैसे शो शामिल हैं।साथ ही उन्हें 'तारा' जैसे सीरियल में लीड रोल में भी देखा गया।

बिहार के खगड़िया में 10 जुलाई 1956 को जन्मे आलोक नाथ झा का बचपन दिल्ली में बीता और उनका शुरू से ही एक्टिंग का काफी रूझान रहा। पिता डॉक्टर थे और मां टीचर, ऐसे में घर के आर्थिक हालात ठीक थे, वे स्कूल में प्ले किया करते थे और अपने स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम में होने वाले नाटक में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते। जब वे नौवीं क्लास में पहुंचे तो उनके एक टीचर और एक्टर ओम शिवपुरी ने उन्हें सलाह दी कि 'तुम टैलेंटेंड हो और तुम्हें सिर्फ साल में एक बार एक्टिंग तक सीमित नहीं होना चाहिए।तुम्हें दूरदर्शन में एक्टिंग के लिए ज़रूर अप्लाई करना चाहिए।'