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रिश्वत का बड़ा खेल : उदयपुर में पकड़ में आए सूचना सहायक ने एसीबी के समक्ष खोले ये राज, बोला…

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ACCUSED ARRESTED

video : उदयपुर में सूचना सहायक 50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, पूर्व में भी ले चुका है 5.50 लाख रुपए

मो. इल‍ियास/ उदयपुर. पचास हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए सूचना सहायक कपिल कोठारी ने एसीबी अधिकारियों को पूछताछ में कि घूस की राशि में से उसने 3 लाख रुपए उपमहानिरीक्षक पंजीयन कविता पाठक व 1.50 रुपए उपपंजीयक हरिसिंह राजपुरोहित को पहुंचाए थे। ब्यूरो टीम अधिकारियों ने उसके बयान रिकॉर्ड करते हुए अधिकारियों को भी जांच के घेरे में लिया है। इधर, डीआईजी स्टॉम्प पाठक ने पत्रिका से बातचीत में स्पष्ट मना करते हुए कहा कि अगर आरोपी ने ऐसा कहा तो झूठ बोल रहा है।
ब्यूरो टीम ने बुधवार शाम को उपपंजीयक कार्यालय (द्वितीय) के सूचना सहायक कपिल कोठारी को नरेन्द्र जैन से जमीन की रजिस्ट्री करवाने के एवज में 50 हजार की घूस लेते पकड़ा था। सत्यापन पुष्टि के दौरान परिवादी ने उसे पूर्व में 5.50 लाख रुपए के बजाए छह लाख रुपए की बात कहकर गुमराह किया तो वह घूम गया। उसने परिवादी को बकायदा अलग-अलग जगह की घूस की सभी जगह बताते हुए स्वयं की लिप्तता व घूस लेने की पुष्टि कर दी।


पहले माथा पकड़ा, फिर खोले राज
आरोपी कोठारी ने पकड़ में आते ही एक बार माथा पकड़ लिया। मीडियाकर्मियों के फोटो खींचने पर मुंह छिपाकर बैठ गया। पूछताछ के बाद उसने बताया कि पूर्व में लिए रिश्वत राशि में से उसने 3 लाख रुपए डीआईजी स्टॉम्प कविता पाठक व 1.50 लाख रुपए सब रजिस्ट्रार हरिसिंह राजपुरोहित को दिए जबकि एक लाख रुपए स्वयं ने रखे। बचे 1.50 रुपए उसे अजमेर कार्यालय में किसी को देने थे लेकिन वहां उसने किसी का नाम नहीं बताया।

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रिश्वत नहीं देने पर पेनल्टी की धमकी
उदयपुर रजिस्ट्री कार्यालय में जांच के बाद जब फाइल को निस्तारण के लिए अजमेर महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय भेजी गई तो आरोपी ने वहां किसी तरह की बाधा न हो इसके लिए परिवादी से 9 लाख रुपए घूस की डिमांड की। यह राशि नहीं देने पर उसने पेनल्टी लगाने के साथ ही अड़चन डालने की धमकी भी दी। वार्ता पर वह 7 लाख रुपए लेने को राजी हुआ। परिवादी का कहना है अप्रेल से वह अब तक टुकड़ों में उसे 5.50 लाख रुपए दे चुका था। बुधवार को वह 1.50 लाख रुपए एक घंटे में लाने का दबाव बना रहा था। परिवादी ने इस पर पेनल्टी के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि सरकारी रसीद के अलावा फाइल पर कोई शुल्क नहीं था। हकीकत सामने आने पर उसने ब्यूरो को सूचना दे दी।

रिश्वत लेते पकड़े गए सूचना सहायक के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। अगर उसने रिश्वत में मेरा नाम लिया है तो वह झूठ बोल रहा है।
कविता पाठक, उपमहानिरीक्षक पंजीयन